फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Jairam thakur said Congressmen oppose Ram and also take oaths.

HP Politics: जयराम बोले- राम का विरोध भी करते हैं और कसमें भी खाते हैं कांग्रेसी

Wed, 17 Jan 2024 07:35 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 17 Jan 2024 07:35 PM IST
सार


जयराम ने प्रेस बयान में कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय करोड़ों राम भक्तों की आस्था और श्रद्धा के विरुद्ध है। कांग्रेस तो भाजपा का विरोध करते-करते अब रामचंद्र का विरोध भी करने लगी है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

विज्ञापन
Jairam thakur said  Congressmen oppose Ram and also take oaths.
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता कुछ भी बोलते हैं। एक तरफ वे अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ भगवान श्रीराम की कसम भी खा रहे हैं। कांग्रेस ने भगवान राम जन्म क्षेत्र मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में नहीं जाने का निर्णय लिया है।

विज्ञापन


जयराम ने प्रेस बयान में कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय करोड़ों राम भक्तों की आस्था और श्रद्धा के विरुद्ध है। कांग्रेस तो भाजपा का विरोध करते-करते अब रामचंद्र का विरोध भी करने लगी है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। राम का विरोध कांग्रेस को बहुत महंगा पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रामचंद्र का विरोध सर्वथा अनुचित है। विक्रमादित्य को प्राण प्रतिष्ठा में जाना चाहिए। इसमें जाने का निमंत्रण बहुत सौभाग्यशाली और बहुत कम लोगों को मिला है।

विज्ञापन

आपदा में भी ओछी राजनीति कर रहे जयराम : चौहान
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पूछा कि वे किस हैसियत से कह रहे हैं कि प्रदेश सरकार को हिमाचल को आपदा राहत का पैकेज नहीं मिलना चाहिए। उन्हें तो मुख्यमंत्री का दुबई जाना भी अखर रहा है।मुख्यमंत्री प्रदेश के लिए निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए गए थे। चौहान ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अनावश्यक बयानबाजी कर रहे हैं। ओछी बयानबाजी और घटिया राजनीति करना उनकी फितरत है। ऐसा करके वे सरकार को अनावश्यक रूप से बदनाम करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

नरेश चौहान ने राज्य सचिवालय में प्रेस वार्ता में कहा कि बरसात में हिमाचल में इतनी बड़ी आपदा आई और प्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, लेकिन विपक्ष के लोगों ने सरकार का साथ देने की बजाय ऐसे संकट के समय भी ओछी राजनीति की, जिससे उनका दोहरा चरित्र लोगों के सामने आ गया। उन्होेंने भाजपा से पूछा कि इस आपदा में विपक्ष की क्या भूमिका रही। राज्य सरकार ने अपने चुनावी दस्तावेज में जो गारंटियां दी थीं, उन्हें चरणबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। चौहान ने कहा कि सरकार ने ‘सरकार गांव के द्वार’ एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम आरंभ किया है। इस कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री भी जिलों के प्रवास पर हैं। सरकार के मंत्री और अधिकारी ग्राम सभाओं में जाकर भी लोगों से संवाद कायम करेंगे तथा उन्हें सरकार के विभिन्न विकासात्मक कार्यक्रमों एवं जन कल्याणकारी नीतियों की जानकारी देंगे।

पूर्व सरकार कर्जे पर कर्जा लेती रही और उस पर कोई बंदिश नहीं थी : चौहान
- चौहान ने कहा कि वर्तमान सरकार के सत्ता संभालते ही पुरानी पेंशन बहाल करने के बाद केंद्र सरकार की ओर से कर्ज लेने की सीमा को 14500 करोड़ से घटाकर 6600 करोड़ कर दिया, जो इस प्रदेश के साथ सरासर बेइंसाफी है। पूर्व सरकार कर्जे पर कर्जा लेती रही और उस पर कोई बंदिश नहीं थी, लेकिन सरकार बदलते ही कर्ज की सीमा को कम कर दिया। उन्होंने कहा कि 2700 करोड़ रूपये का कर्ज केवल तीन साल में ही लिया जा सके।

गैस्ट फेकल्टी टीचर की नियुक्ति पर नरेश चौहान ने कहा - यह सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था
- गैस्ट फेकल्टी टीचर की नियुक्ति पर नरेश चौहान ने कहा कि यह सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था है, लेकिन शिक्षित बेरोजगार युवाओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों में गैस्ट फेकल्टी टीचर की सेवाएं ली जाएंगी क्योंकि शिक्षा विभाग में एक साल में 10 हजार के करीब तबादले होते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और इसके लिए मेधावी छात्रों को गैस्ट फेकल्टी के तौर पर रखा जाएगा।
 

कांग्रेस ने बयान देने से पहले ऐतिहासिक तथ्य नहीं समझे : धूमल
 पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने कहा कि सरकार की ओर से दिए उस बयान को पढ़कर उन्हें आश्चर्य हुआ है, जिसमें भाजपा के हिमाचल विरोधी मानसिकता का जिक्र किया गया है। लगता है कि बयान देने से पहले ऐतिहासिक तथ्यों को समझा ही नहीं गया और इसी कारण तथ्यों के विपरीत यह बयान दिया गया। धूमल ने प्रेस बयान में कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपना अधिकार और बकाया राशि लेने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए। सरकार के पास सारे रिकाॅर्ड कानूनी लड़ाई से लेकर अन्य पत्राचार तक उपलब्ध हैं, पैसा तो संबंधित राज्यों से लेना था। इसमें यदि अपना पक्ष सही ढंग से रखा जाता तो निश्चित तौर पर प्रदेश को लाभ होता। दोषारोपण से कोई लाभ होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि शिमला में पहली नवंबर 1966 को पंजाब का पुनर्गठन हुआ, उसमें से हरियाणा नया राज्य बना और पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल में शामिल हुआ, उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।

संसद में पारित कानून पंजाब पुनर्गठन अधिनियम -1966 के तहत जितनी आबादी पुनर्गठन के आधार पर जिस प्रदेश में गई, उतनी ही परिसंपत्तियां और देनदारियां उस राज्य को मिलीं। उस समय देश और तीनों प्रदेशों में कांग्रेस सत्ता में थी, मगर दुख की बात है कि जब भाखड़ा बांध व अन्य परियोजनाओं का बंटवारा हो रहा था, तब हिमाचल सरकार के मुख्यमंत्री या मंत्री किसी बैठक में शामिल नहीं हुए। परिणामस्वरूप हिमाचल का दावा कमजोर रहा। धूमल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने ही विद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी और हिमाचल के हिस्से का प्रश्न उठाया। अपनी मांगों को लेकर हिमाचल से लेकर दिल्ली तक अधिकार यात्रा निकाली। उन्होंने कहा कि 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली का हिस्से का यह मुद्दा भी शांता कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए उठाया और तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा मंत्री कल्पनाथ राय ने समर्थन किया। हिमाचल को रॉयल्टी दिलाने का श्रेय भी भाजपा नेतृत्व को जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed