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'सेब किस्मों की होड़ से इटली की बराबरी नहीं कर सकता हिमाचल'

Mon, 21 May 2018 12:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कुफरी (शिमला)
अमर उजाला ब्यूरो, कुफरी (शिमला) Updated Mon, 21 May 2018 12:50 PM IST
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italian apple varieties in himachal Pradesh

सेब की नई-नई किस्मों की होड़ से हिमाचल इटली की बराबरी नहीं कर सकता। इटली और हिमाचल की सेब पैदावार में बड़ा अंतर है। ये बात इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ बोलोनिया कृषि विज्ञान विभाग के फल विज्ञान विशेषज्ञ प्रो. गुगलिलमो कोस्टा ने कही। प्रो. कोस्टा ने कहा कि बागवानी के लिए जैसा आधारभूत ढांचा आज हिमाचल में है, वैसा इटली में पचास साल पहले था।

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प्रो. कोस्टा कुफरी में प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन (पीजीए) की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे। प्रो. कोस्टा ने ‘किस्में और रूटस्टॉक: इटली में उच्च घनत्व खेती’ और ‘फलों की थिनिंग’ इन दो विषयों पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सेब की नई-नई किस्मों को अपनाने के बजाय यहां प्लानिंग और तकनीक को मजबूत करेें।
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उपभोक्ताओं को उप किस्में नहीं लाल, हरा या पीला सेब चाहिए। वे रेड डिलिशियस, गाला, फ्यूजी आदि की मांग कर सकते हैं, मगर इनकी उप किस्मों की नहीं। ऐसे में जो किस्में बगीचों में उगी हैं, वे भी सही हो सकती हैं। किस्में वहीं लगाई जानी चाहिए, जो उस परिवेश विशेष के लिए उपयुक्त हैं या जिनका परीक्षण हो चुका है।
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जहां अच्छी नमी है, वहां ऐसे रूट स्टॉक इस्तेमाल करें जिनकी जडे़ं गहरी नहीं जाती हैं, मगर जहां नमी कम हैं, वहां गहरी जड़ों वाले रूट स्टॉक ही लगाएं, ताकि वे गहरे से नमी सोख सकें। उन्होंने कहा कि अगर सेब के फलों का अच्छा आकार लेना है तो इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से थिनिंग जरूरी है।

उन्होंने बागवानों को थिनिंग की तकनीक से भी अवगत करवाया। इस मौके पर पीजीए के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट और महासचिव कुनाल सिंह चौहान ने प्रो. कोस्टा और इंडो इटेलियन चैंबर के उप महासचिव अमर जोशी को सम्मानित भी किया। कई युवा प्रगतिशील बागवानों डिंपल पांजटा, राजेश खिमटा, कुनाल रावत, दीक्षित चौहान, संजय पिरटा, अजय आजाद, कै लाश शर्मा आदि ने अपने अनुभव साझा किए। 


तो इटली से क्यों मंगवाई जा रही सेब किस्में 
एक तरफ इटली के ही विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ प्रो. कोस्टा सेब किस्मों की होड़ को सही नहीं मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 1134 करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना के तहत इटली से ही पौधे आयात किए जा रहे हैं। सम्मेलन में इस विरोधाभास पर भी बागवानों में चर्चा रही। 

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