Himachal News: सीएम सुक्खू की जन आभार रैली में हार्ट अटैक से आईपीएस अधिकारी की मौत
वर्ष 2020 में साजू राम राणा को राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया था। पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने कहा कि राणा कर्मठ पुलिस अधिकारी थे।
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प्रदेश सरकार की धर्मशाला विधानसभा के तहत जोरावर स्टेडियम में हुई जन आभार रैली में ड्यूटी के दौरान आईपीएस अधिकारी साजू राम राणा की हार्ट अटैक से मौत हो गई। चतुर्थ आईआरबी जंगलबैरी में समादेशक के पद पर तैनात राणा की ड्यूटी जनआभार रैली के लिए लगी थी। निधन से उनके गृह क्षेत्र मंडी के धर्मपुर में शोक की लहर है। मंगलवार को ड्यूटी के दौरान करीब 2:00 बजे उन्हें हार्ट अटैक आ गया।
इसके बाद उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला पहुंचाया गया, लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। राणा हमीरपुर के जंगलबैरी पुलिस बटालियन में बतौर कमांडेंट तैनात थे। जंगलबैरी पुलिस बटालियन में तैनाती से पहले राणा बिलासपुर और किन्नौर जिला के पुलिस अधीक्षक रह चुके थे। वर्ष 2020 में राणा को राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया था।
पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने कहा कि राणा कर्मठ पुलिस अधिकारी थे। राणा के निधन पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि वह दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं तथा प्रदेश सरकार राणा के परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।
उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित थे राणा
वर्ष 2020 में आईपीएस अधिकारी स्व. साजू राम राणा को भारत सरकार ने उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। वह 1 सितंबर,1990 को पुलिस विभाग में बतौर निरीक्षक भर्ती हुए थे। अपनी 32 साल 11 महीने के सेवाकाल के दौरान उन्होंने प्रदेश की विभिन्न जिलों में बतौर उप पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित जिला कांगड़ा, बिलासपुर, सोलन, चंबा और भारतीय आरक्षित वाहिनियों में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2009 में उनकी बतौर पुलिस अधीक्षक पदोन्नति हुई थी। जनवरी 2020 में उनकी आईपीएस में पदोन्नति हुई थी।
नशे के खात्मे के लिए साजू राम राणा ने चलाया था अभियान
आईपीएस साजू राम राणा ने पुलिस अधीक्षक के रूप में अंतिम बार बिलासपुर में सेवाएं दी थी। साजू राम राणा एक साल से ज्यादा बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक रहे। उनके कार्यकाल में हत्या के चार मामले सुलझाए गए। साजू राम राणा ने 18 अगस्त 2021 को बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यभार संभाला और 27 सितंबर 2022 को जंगलबैरी बटालियन के लिए स्थानांतरित हुए।
राणा ने अपने कार्यकाल में अवैध नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यशाला कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिनिधियों को नशे के अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए सूचना का आदान प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। साजू राम राणा का मानना था कि नशाखोरी को खत्म केवल लोगों के सहयोग से ही खत्म किया जा सकता है। साजू राम राणा के कार्यकाल के दौरान बिलासपुर जिले में मादक पदार्थ अधिनियम के करीब 200 मामले दर्ज किए गए।
राणा ने बिलासपुर से स्थानांतरित होने से पहले चर्चित अंकित हत्याकांड को सुलझाया। अंकित का शव घर के पास जंगल में कई टुकड़ों में बरामद हुआ था। शव मिलने के दो दिन बाद हत्या करने के आरोप में अंकित के दो चचेरे भाइयों, छोटे चचेरे भाई की पत्नी, चाचा और दो प्रवासी व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा उन्होंने हत्या के तीन अन्य मामले भी सुलझाए।
सुनाई थी एक मां की आपबीती
साजू राम राणा ने पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यशाला में एक मां की आपबीती सुनाई थी। साजू राम राणा ने बताया था एक दिन आधी रात को एक महिला का फोन आया। महिला के अनुसार उसके बेटे को नशे की ऐसी लत लगी है कि अब वह नशे के बिना नहीं रह सकता और वह खुद नशा लेकर उसे देती है। महिला ने नशे के कारोबारियों को पकड़ने की गुहार लगाई थी।