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IPH का दावा: तीन बार टेस्ट करते थे पीने का पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 08 Jan 2016 12:11 PM IST
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शिमला के लोगों को सीवरेज युक्त पानी पिलाने के मामले में राज्य सरकार की ओर से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। कोर्ट ने स्टेट्स रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत शर्मा को जरूरी सुझाव देने को कहा। मामले पर शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी।
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राज्य सरकार ने रिपोर्ट में बताया कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना को सुनिश्चित करने के लिए कारगर कदम उठाए हैं। शिमला में फैल रहे पीलिया की समाचार पत्रों में छपी खबरों को देखते हुए दो जनवरी को आईपीएच विभाग के अधिकारियों ने अश्वनी खड्ड क्षेत्र का दौरा किया था। 4 जनवरी तक शिमला में 226 मामले पीलिया के पाए गए।
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सरकार के मुताबिक आईपीएच विभाग रोजाना पानी सप्लाई करने से पहले तीन बार पानी के टेस्ट करता है। अश्वनी खड्ड में ट्रीटमेंट से पहले और बाद में तथा उसके बाद कुसुम्पटी स्टोरेज टैंक में पानी चेक किया जाता है। विवादित पेयजल योजना से फिलहाल पानी की सप्लाई बंद कर दी है।
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1992 में शुरू हुई थी अश्वनी योजना- वर्ष 1992 में अश्वनी खड्ड से विकास नगर, छोटा शिमला, न्यू शिमला और साथ लगते स्थानों के लिए पेयजल योजना शुरू की थी। पहले अश्वनी खड्ड से वाटर लिफ्टिंग योजना शिमला डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 70 हजार लोगों को पानी मुहैया करवाने के लिए बनाई थी।
वर्ष 1994 में आईपीएच विभाग ने अपने अधीन इसे लिया था। इसके लिफ्ट प्लांट के 6 किलोमीटर ऊपर एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 2004 में बनाया गया। इस प्लांट में सीवरेज ट्रीटमेंट के बाद उचित ढंग से ट्रीट कर पानी छोड़ा जाता है।
गिरि, गुम्मा की बढ़ा रहे क्षमता- गिरि और गुम्मा की वाटर लिफ्टिंग क्षमता बढ़ाई जा रही है। पीलिया को रोकने के लिए जरूरी और कारगर कदम उठाये जा रहे हैं। जनता को मीडिया के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।