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Scrub Typhus: इंट्रोवेनस डॉक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन खाने से नहीं जाएगी स्क्रब टायफस से पीड़ित की जान

Thu, 02 Mar 2023 09:58 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी/शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी/शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 02 Mar 2023 09:58 PM IST
सार

केवल इंट्रोवेनस डॉक्सीसाइक्लिन या फिर एजिथ्रोमाइसिन की तुलना में दोनों के मेल से चिकित्सा उपचार के बेहतर परिणाम मिले हैं।

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Intravenous Doxycycline Azithromycin both used for treatment of
प्रो. जॉर्ज एम वर्गीस टीम के साथ। - फोटो : संवाद

विस्तार

अब इंट्रोवेनस डॉक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन को मिलाकर खाने से स्क्रब टायफस से पीड़ित किसी भी मरीज की जान नहीं जाएगी। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) अस्पताल के डॉक्टर संजय के महाजन समेत भारत के विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ता डॉक्टरों की टीम ने नया फार्मूला ढूंढा है। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेलूर के डॉ. जार्ज एम वर्गीस की अध्यक्षता में चले इस प्रोजेक्ट में 800 से अधिक मरीजों पर इसका प्रयोग किया गया, जिससे वे स्वस्थ हो गए।

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स्क्रब टायफस का डॉक्सीसाइक्लिन या क्लोरैमफेनिकॉल से इलाज का चलन रहा है। यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सी दवा और इसका कितनी मात्रा प्रयोग करना सही है। नए शोध में 800 गंभीर वयस्क रोगी शामिल किए गए। मरीजों को तीन समूहों में विभाजित कर सात दिन के लिए इंट्रावेनस डॉक्सीसाइक्लिन, इंट्रोवेनस एजिथ्रोमाइसिन या फिर इंट्रोवेनस डॉक्सीसाइक्लिन और एजिथ्रोमाइसिन दोनों को मिलाकर दिया गया।
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उपचार में लगी टीम, अध्ययन प्रबंधन समूह और प्रतिभागियों को नहीं बताया गया था कि किस रोगी को किस समूह में रखा गया या कैसा उपचार दिया गया। 28वें दिन किसी भी कारण से मृत्यु, 7वें दिन लगातार समस्याएं और 5वें दिन लगातार बुखार को सूचक मानकर उपचार के असर का आकलन किया। दुष्प्रभावों का भी आकलन किया गया।
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देखा गया कि केवल इंट्रोवेनस डॉक्सीसाइक्लिन या फिर एजिथ्रोमाइसिन की तुलना में दोनों के मेल से चिकित्सा उपचार के बेहतर परिणाम मिले। शोधकर्ताओं ने इंट्रा वीनस ट्रीटमेंट ऑफ स्क्रब टायफस प्रोजेक्ट साल 2018 में शुरू किया गया था, जो 2022 में पूरा हुआ।

यह संक्रमण ओरिएंटिया सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया का जानलेवा संक्रमण है। मुख्य रूप से चूहों का यह संक्रमण ट्रॉम्बिक्युलिड माइट्स के लार्वा से मनुष्यों में फैलता है। भारत में इससे हर साल 1.5 लाख लोग दम तोड़ देते हैं। यह नया अध्ययन स्क्रब टायफस के गंभीर मामलों के उपचार पर अब तक का सबसे बड़ा नियंत्रित रैंडम ट्रायल है। इसका प्रकाशन हाल ही में द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में किया गया।

शोधकर्ता टीम में ये संस्थान और डॉक्टर रहे शामिल
शोध में सहयोगी संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रोहतक, जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च (जेआईपीएमईआर) पुडुचेरी, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेलूर, एसवीआईएमएस तिरुपति और केएमसी मणिपाल शामिल रहे।


क्या कहते हैं प्रो. जार्ज
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेलूर (तमिलनाडु) के संक्रामक रोग विभाग के प्रो. जॉर्ज एम वर्गीस ने कहा कि शोध से सामने आया कि एजिथ्रोमाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन को मिलाकर उपचार करने से रोगियों को 7वें दिन अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। उन्हें लगातार परेशान करने वाली समस्याएं कम हो जाती हैं, जैसे सांस फूलने का सिंड्रोम (एआरडीएस), हेपेटाइटिस, गुर्दे का काम नहीं करना।

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