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Himachal: क्रिप्टो घोटाले के मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा पर कसेगा इंटरपोल का शिकंजा, दुबई से भारत लाने की तैयारी

Fri, 17 Jul 2026 05:40 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 17 Jul 2026 05:40 AM IST
सार

भारत से फरार होकर दुबई में छिपे आरोपी को वापस लाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के माध्यम से इंटरपोल से संपर्क किया है। आरोपी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसकी गिरफ्तारी के लिए अलर्ट किया जाएगा।
 

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Interpol tightens its grip on crypto scam mastermind Subhash Sharma, preparing to bring him to India from Duba
हिमाचल में क्रिप्टोकरेंसी ठगी। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

बहुचर्चित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा पर जांच एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कस दिया है। भारत से फरार होकर दुबई में छिपे आरोपी को वापस लाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के माध्यम से इंटरपोल से संपर्क किया है। आरोपी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसकी गिरफ्तारी के लिए अलर्ट किया जाएगा। जांच एजेंसियों के अनुसार, सुभाष शर्मा लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और ईडी की ओर से जारी किए गए समन की लगातार अनदेखी करता रहा। इसके बाद उसके खिलाफ भारतीय अदालत से गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) हासिल किया गया। इसी कानूनी आधार पर इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया जाएगा। अब आरोपी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश तेज होगी और उसकी गिरफ्तारी के बाद भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

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जांच में ये खुलासा हुआ
जांच में सामने आया है कि आरोपी नेटवर्क ने कॉर्वियो और डीजीटी कॉइन के नाम पर मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल तैयार कर निवेशकों को रातों रात अमीर बनाने और क्रिप्टोकरेंसी में भारी मुनाफे का लालच दिया। आरोप है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करीब 2.5 लाख लोगों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई। मामले में जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े 76 से अधिक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी हैं। ईडी की जांच टीम अब धोखाधड़ी से जुड़े 100 से अधिक आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा खंगाल रही है। इनमें से 12 आरोपियों के ठिकानों पर ईडी की टीम दो बार कार्यवायी कर चुकी है। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा पर है। ईडी पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अब तक आरोपियों की करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज कर चुकी है।

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यह है मामला
यह पूरा मामला हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे बढ़ा। पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद ईडी ने आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की। जांच में यह भी सामने आया कि सुभाष शर्मा ने कथित तौर पर निवेशकों से जुटाई गई करोड़ों रुपये की रकम को हवाला नेटवर्क के जरिए दुबई ट्रांसफर किया। इसके बाद वहां इस रकम को विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर बेनामी संपत्तियां खड़ी करने का आरोप है।

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क्या होता है रेड कॉर्नर नोटिस
रेड कॉर्नर नोटिस गिरफ्तारी का स्वत: आदेश नहीं होता, बल्कि इसके माध्यम से इंटरपोल सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से वांछित आरोपी की पहचान, गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई के लिए सहयोग का अनुरोध किया जाता है। सुभाष शर्मा के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद निवेशकों को भी अपनी डूबी रकम की वापसी और न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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