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परंपराः वोट के लिए मतदाताओं को खिलाए जाते हैं चावल

Mon, 28 Dec 2015 04:17 PM IST
Updated Mon, 28 Dec 2015 04:17 PM IST
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interesting ritual for panchayat election, devta rice for vote.

पंचायत चुनाव में मतदाताओं को रिझाने के लिए जिला सिरमौर में देवता के चावल खिलाने की अनूठी परंपरा है। जिले में इस प्रथा का प्रभाव लूण लोटा प्रथा से भी ज्यादा कारगर माना जाता है। इस अनोखी परंपरा के मुताबिक देवता के घणिता (गूर) से उम्मीदवार आशीर्वाद के रूप में चावल लेता है। फिर गांव में लोगों को अपने पक्ष में मतदान करने की कसम खिलाकर उन्हें चावल के थोड़े-थोड़े दाने खाने के लिए देता है।

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देवता के चावल खाने के बाद यदि मतदाता अपने वादे के अनुसार वोट नहीं डालता है तो कहा जाता है कि उसे देव दोष लगता है। प्रत्याशी इस कारगर हथियार का प्रयोग करते अकसर देखे जा सकते हैं। वैसे यह प्रयोग उस गांव में ज्यादा किया जाता है, जिस गांव का प्रत्याशी होता है। ऐसे में उस गांव के सभी लोगों का ईष्ट देवता एक होता है। उसके प्रति प्रत्याशी और मतदाताओं की श्रद्धा होती है।

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दूसरे गांव में बांटे जाते हैं चावल

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प्रत्याशी दूसरे गांव में इसका प्रयोग करते हैं तो उस गांव में अपने समर्थक के माध्यम से देवता के चावल बांटे जाते हैं। ये सामूहिक बांटे जाते हैं। सभी के सामने इन्हें साबुत निगला जाता है। इसे ज्यादा महत्व वाला बनाने के लिए कई बार जिस व्यक्ति में देवता की हवा आती है यानी जो घणिता (गूर) होता है, उसी के माध्यम से चावल बांटे जाते हैं।

जिले में लूण लोटा की प्रथा में प्रत्याशी अपने पक्ष में मतदान के लिए मतदाता को लोटे में नमक डालकर कसम खाने को कहता है, लेकिन देवता के चावल का भय ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक है। लोग देवी-देवताओं को काफी मानते हैं। देव दोष का भय भी मानते हैं। ऐसे में देवता के चावल लूण लोटा से ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं।

राजगढ़ क्षेत्र में शिरगुल देवता, बिजट देवता, पालू देवता, नरसिंह देवता और विष्णु देवता आदि के मंदिर बड़ी संख्या में हैं। इन्हीं देवताओं के चावल खिलाने की प्रथा है। रेणुका में भंगाईणी माता, रेणुका माता आदि की भी मान्यता है।

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