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सूचना आयोग का फैसला: आरटीआई की गिरदावरी में सरकारी भूमि के अतिक्रमण की रिपोर्ट रिकॉर्ड नहीं कर सकते पटवारी
Sun, 27 Mar 2022 02:21 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 27 Mar 2022 02:21 PM IST
सार
कोई भी पटवारी या राजस्व अधिकारी सरकारी भूमि के मालिकाना हक, कब्जे, किराये और वर्गीकरण को न तो मिटा सकता है और न ही उसे तय कर सकता है। ऐसा केवल जिला नियंत्रक के आदेश से ही हो सकता है। यह टिप्पणी राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान ने एक अपील पर की है।
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राज्य सूचना आयोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य सूचना आयोग ने कहा कि सरकारी भूमि के अतिक्रमण को गिरदावरी या जमाबंदी में पटवारी नहीं कर सकता है। हालांकि, वह अतिक्रमण का मामला तैयार कर सकता है। सरकारी जमीन के अलावा अन्य भूमि का पटवारी या अन्य निरीक्षण अधिकारी वर्गीकरण बदल सकता है, यदि यह अविवादित हो। ऐसा भी घटनास्थल की स्थिति के हिसाब से हो सकता है, लेकिन बंजर भूमि बारानी बन गई हो या बारानी जमीन सिंचित या इसके उलट हो गई हो। कोई भी पटवारी या राजस्व अधिकारी सरकारी भूमि के मालिकाना हक, कब्जे, किराये और वर्गीकरण को न तो मिटा सकता है और न ही उसे तय कर सकता है। ऐसा केवल जिला नियंत्रक के आदेश से ही हो सकता है।
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यह टिप्पणी राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान ने एक अपील पर की है। पालमपुर निवासी अपीलकर्ता बलवीर सिंह ने आरटीआई की दरख्वास्त में तहसील कार्यालय पालमपुर के जनसूचना अधिकारी से सूचना मांगी। यह वर्ष 2019 की गिरदावरी से संबंधित थी। यह मोहाल भरार मौजा सिद्धपुर सरकारी के बारे में मांगी गई। प्रतिवादी ने इस संबंध में आवेदक को जवाब दिया कि यह सूचना थर्ड पार्टी से संबंधित है कि नहीं। इसके बाद आवेदक को गिरदावरी रिपोर्ट भी भेजी गई, मगर आयोग के समक्ष आवेदक ने अपील दायर की कि उसे अधूरी सूचना दी गई है।
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इसमें कहा गया कि गिरदावरी रिपोर्ट में घरों, बाउंड्री वॉल आदि को नहीं दर्शाया गया है। इन्हें विभिन्न लोगों ने बनाया है। आवेदक ने संबंधित जमीन के बारे में एक एफिडेविट की भी मांग की है। जो अतिक्रमण की हुई भूमि के नियमितीकरण के समय राजस्व अथॉरिटी को दिया गया है। बाद में आवेदक ने यह कहा कि उसने किसी और का हलफनामा मांगा था, जबकि उसे किसी और का दे दिया गया। एसडीएम पालमपुर के समक्ष दायर की गई एक अन्य अरजी में कहा गया कि उसे जो सूचना दी गई, उसमें घटनास्थल की सही स्थिति नहीं दिखाई गई है। एसडीएम पालमपुर ने इस आदेश के साथ यह प्रथम अपील खारिज कर दी थी कि उसे जो सूचना दी गई थी, वह इसलिए खारिज की गई है, क्योंकि जो रिकॉर्ड में सूचना उपलब्ध थी, उसे दे दिया गया है।
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