महंगाई: 40 फीसदी तक महंगी हो गई रासायनिक खाद, किसानों-बागवानों में रोष
पहले ही चौतरफा महंगाई की मार झेल रहे किसानों और बागवानों की परेशानी और बढ़ा दी है। रासायनिक खादों के दामों में 40 फीसदी तक वृद्धि हुई है। करसोग में गेहूं, नकदी फसलों और सेब के बगीचों में पोटाश सहित 12-32-16 का इस्तेमाल किया जाता है।
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हिमाचल प्रदेश में रासायनिक खादों के दाम बढ़ गए हैं। किसानों और बागवानों की कीमतें बढ़ने पर सरकार के प्रति रोष व्यक्त किया है। पहले ही चौतरफा महंगाई की मार झेल रहे किसानों और बागवानों की परेशानी और बढ़ा दी है। रासायनिक खादों के दामों में 40 फीसदी तक वृद्धि हुई है। करसोग में गेहूं, नकदी फसलों और सेब के बगीचों में पोटाश सहित 12-32-16 का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में रासायनिक खाद के भाव में हुई बढ़ोतरी से किसानों की जेब और अधिक ढीली होगी। नए दाम के अनुसार 12:32:16 खाद 315 रुपये तक महंगी हो गई है। यानी जीएसटी के साथ अब किसानों को यही खाद 1450 रुपये प्रति बैग मिलेगी, जबकि इस खाद की कीमत पहले 1135 रुपये प्रति बैग थी।
इसी तरह से 15:15:15 खाद भी 170 रुपये प्रति बैग महंगी हुई। यह खाद अब जीएसटी को जोड़कर 1350 रुपये में मिलेगी। इसका पुराना दाम 1180 रुपये प्रति बैग के करीब था। आईपीएल पोटाश के भी अब किसानों को 1150 रुपये चुकाने होंगे। बता दें कि किसान एक मात्र ऐसा वर्ग जो अपने उत्पाद की कीमत खुद तय नहीं करता है, लेकिन फसल तैयार करने के लिए उसे जिन उपकरणों व खादों की जरूरत पड़ती है उसके लिए किसान को हर तरह की कीमत चुकानी पड़ती है। बावजूद इसके हाल ही में हुई खादों के दाम में वृद्धि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। विक्रेताओं में जीवन राम ने कहा कि हिमाचल में अच्छी उपज लेने के लिए खाद की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके तहत 1985-86 में उर्वरकों की जो खपत 23,664 मीट्रिक टन थी, वह 2018-19 में बढ़कर 57,560 मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
घाटे का सौदा बनी खेती
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव और बागवान श्याम सिंह चौहान का कहना है कि खाद के भाव बढ़ने से किसानों पर मार पड़ी है। लगातार बढ़ रहे रासायनिक खादों के दाम से किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा बन गया है।