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Shimla News: एचपीयू के एआई केंद्र से उद्योग और स्टार्टअप को मिलेगा मंच
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केंद्र में एआई और साइबर फिजिकल सिस्टम्स जुड़ेगा, इंजीनियरिंग, बेसिक साइंस, कंप्यूटर साइंस विभाग भी होंगे शामिल
7.65 करोड़ रुपये की परियोजना से होगा केंद्र का विकास
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर फिजिकल सिस्टम्स केंद्र स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा बहुविषयक शोध, तकनीकी समाधान विकसित करने और स्टार्टअप को सहयोग देने का होगा।
केंद्र में एआई और साइबर फिजिकल सिस्टम्स को कई क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। इसमें इंजीनियरिंग, बेसिक साइंस, कंप्यूटर साइंस, मानविकी और जैव विज्ञान जैसे विभागों को शामिल किया जाएगा। यह विभिन्न विषयों के शोध को एक साझा मंच देगा। परियोजना प्रस्ताव में परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य, स्मार्ट ट्रैफिक, ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, औद्योगिक स्वचालन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग चिह्नित किए हैं। इससे हिमाचल की जरूरतों के लिए तकनीकी समाधान विकसित होंगे। केंद्र का लक्ष्य शोध एवं विकास, तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल और उत्पाद विकास को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय इसे राज्य और अपने लिए तकनीकी शोध का एक महत्वपूर्ण मंच बनाना चाहता है।
केंद्र की अनुमानित लागत 7.65 करोड़ रुपये है। पहले चरण में 3.24 करोड़ रुपये मौजूदा नेटवर्किंग सुविधा को मजबूत करने पर खर्च होंगे। दूसरे चरण के लिए करीब 4.41 करोड़ रुपये का अनुमान है। डीआरडीओ, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग जैसी एजेंसियां अतिरिक्त वित्तीय सहयोग देंगी।
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रक्षा क्षेत्र से जुड़ाव और संयुक्त शोध
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बताया कि अक्तूबर 2025 में सेना के एक अधिकारी ने एचपीयू केंद्र के साथ चर्चा की थी। इसमें रक्षा क्षेत्र में संयुक्त शोध, वित्तीय सहयोग और कौशल विकास की संभावनाओं पर बात हुई। साइबर सुरक्षा, एआई और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों को सहयोग के संभावित विषयों के रूप में रखा गया। यह जुड़ाव केंद्र के बहुआयामी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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7.65 करोड़ रुपये की परियोजना से होगा केंद्र का विकास
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर फिजिकल सिस्टम्स केंद्र स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा बहुविषयक शोध, तकनीकी समाधान विकसित करने और स्टार्टअप को सहयोग देने का होगा।
केंद्र में एआई और साइबर फिजिकल सिस्टम्स को कई क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। इसमें इंजीनियरिंग, बेसिक साइंस, कंप्यूटर साइंस, मानविकी और जैव विज्ञान जैसे विभागों को शामिल किया जाएगा। यह विभिन्न विषयों के शोध को एक साझा मंच देगा। परियोजना प्रस्ताव में परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य, स्मार्ट ट्रैफिक, ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, औद्योगिक स्वचालन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग चिह्नित किए हैं। इससे हिमाचल की जरूरतों के लिए तकनीकी समाधान विकसित होंगे। केंद्र का लक्ष्य शोध एवं विकास, तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल और उत्पाद विकास को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय इसे राज्य और अपने लिए तकनीकी शोध का एक महत्वपूर्ण मंच बनाना चाहता है।
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केंद्र की अनुमानित लागत 7.65 करोड़ रुपये है। पहले चरण में 3.24 करोड़ रुपये मौजूदा नेटवर्किंग सुविधा को मजबूत करने पर खर्च होंगे। दूसरे चरण के लिए करीब 4.41 करोड़ रुपये का अनुमान है। डीआरडीओ, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग जैसी एजेंसियां अतिरिक्त वित्तीय सहयोग देंगी।
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रक्षा क्षेत्र से जुड़ाव और संयुक्त शोध
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बताया कि अक्तूबर 2025 में सेना के एक अधिकारी ने एचपीयू केंद्र के साथ चर्चा की थी। इसमें रक्षा क्षेत्र में संयुक्त शोध, वित्तीय सहयोग और कौशल विकास की संभावनाओं पर बात हुई। साइबर सुरक्षा, एआई और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों को सहयोग के संभावित विषयों के रूप में रखा गया। यह जुड़ाव केंद्र के बहुआयामी दृष्टिकोण को दर्शाता है।