चिनाब प्रोजेक्ट पर नरम पड़ा पाकिस्तान
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति म्याड़ घाटी के शकौली गांव में चिनाब की धारा पर बन रहे 120 मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट पर फिलहाल पाकिस्तान को कोई आपत्ति नहीं है।
मंगलवार को सिंधु जलसंधि स्थायी आयोग के सदस्यों ने 118वां संयुक्त निरीक्षण किया। इसमें भारत और पाकिस्तान के आयुक्त भी शामिल रहे। मंगलवार को निरीक्षण के दौरान दोनों देशों के नुमाइंदों ने बड़े दोस्ताना माहौल में चिनाब की सहायक नदी म्याड़ पर बनने वाले प्रोजेक्ट पर चर्चा की।
हालांकि, संवेदनशील मुद्दा होने के चलते दोनों देशों के आयुक्तों ने मीडिया के सामने कोई खुलासा नहीं किया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि फिलहाल पाकिस्तान को इस प्रोजेक्ट पर कोई आपत्ति नजर नहीं आई।
सिंधु जनसंधि का हर हाल में हो सम्मान
भारत और पाकिस्तान के दोनों आयुक्तों ने माना कि विकास वक्त की जरूरत है, लेकिन यह भी ख्याल रखा जाए कि सिंधु जलसंधि की शर्तों को किसी भी हाल में तोड़ा न जाए।
म्याड़ में बन रही परियोजना की डीपीआर भी पाकिस्तानी आयोग की टीम ने खंगाली। आयोग के पाकिस्तानी आयुक्त मिर्जा आसिफ बेग को परियोजना निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट प्रभारी एसके खरे से बांध की ऊंचाई, टनल और बिजली उत्पादन क्षमता की जानकारी दी।
भारतीय दल का नेतृत्व आयोग के आयुक्त के. बोहरा ने किया। करीब आधे घंटे तक दोनों मुल्कों के प्रतिनिधियों के बीच सिंधु जलसंधि के मसौदे पर चरचा हुई। सिंधु जलसंधि स्थायी आयोग देश में 118वां जबकि हिमाचल में पहला दौरा है।
1960 में हुआ था समझौता
वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच चिनाब समेत उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को लेकर सिंधु जलसंधि समझौता हुआ।
इस पर दोनों देश आज तक अमल करते आ रहे हैं। इस बार आयोग देश में चिनाब पर बनने वाली एक दर्जन परियोजनाओं का संयुक्त निरीक्षण करेगा।