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Doppler Radar Anti Hailgun: हिमाचल में सेब को ओलों से बचाएगी स्वदेशी डॉप्लर रडार एंटी हेलगन

Mon, 15 Jul 2024 10:54 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, शिमला
विश्वास भारद्वाज, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 15 Jul 2024 10:54 AM IST
सार

प्रदेश की 5,000 करोड़ की सेब आर्थिकी को ओलों से बचाने के लिए आईआईटी मुंबई की ओर से विकसित स्वदेशी एंटी हेलगन को डॉप्लर रडार से जोड़ा जाएगा। 

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Indigenous Doppler radar anti hailgun will save apples from hail in Himachal
स्वदेशी डॉप्लर रडार एंटी हेलगन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ की सेब आर्थिकी को ओलों से बचाने के लिए आईआईटी मुंबई की ओर से विकसित स्वदेशी एंटी हेलगन को डॉप्लर रडार से जोड़ा जाएगा। रडार की मदद से ओलों वाले बादलों की स्टीक जानकारी मिलेगी और हेलगन का प्रभाव बढ़ेगा। शिमला जिले के मंढोल में स्थापित स्वदेशी एंटी हेलगन के तीन साल का ट्रायल पूरा होने के बाद आईआईटी मुंबई के इंजीनियरों ने निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया है। डीआरडीओ की पुणे लैब के वैज्ञानिक इसमें तकनीकी सहयोग देंगे।

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हेलगन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने की भी संभावना तलाशी जाएगी। खास बात यह है कि विदेशों से आयातित एंटी हेलगन की कीमत करीब डेढ़ करोड़ है जबकि आईआईटी मुंबई की ओर से विकसित स्वदेशी एंटी हेलगन की कीमत महज 31 लाख है। विदेशी हेलगन चलाने के लिए एसिटिलीन गैस इस्तेमाल होती है। यह बहुत मंहगी है और आसानी से नहीं मिलती। स्वदेशी हेलगन एलपीजी से चलती है। इसलिए इसके संचालन का खर्चा कम है।

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रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एचईएमआरएल पुणे के निदेशक डाॅ. एपी दास ने बताया कि स्वदेशी एंटी हेलगन से पर्यावरण को नुकसान की संभावना नहीं है। हेलगन से नियंत्रित तरीके से तरंगें वायुमंडल में जाती हैं। जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। उनकी टीम ने परीक्षण के दौरान आंकड़ों का अध्ययन किया है, रिपोर्ट आईआईटी मुंबई को जल्द सौंपी जाएगी। डाॅप्लर वेदर रडार स्थापित कर सटीक आंकड़ों से इसका प्रभाव बढ़ाया जा सकता है।

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जाली के स्थान पर हेलगन पर अनुदान दे सरकार 
सरकार ओलों से बचाव करने वाली जाली पर 80 फीसदी अनुदान दे रही है। इसके स्थान पर स्वदेशी एंटी हेलगन स्थापित करने पर अनुदान दिया जाना चाहिए। इससे छोट-बड़े सभी बागवान लाभान्वित होंगे। बागवानों को बगीचों में नेट चढ़ाने-उतारने का खर्चा भी बचेगा।- हरीश चौहान, संयोजक संयुक्त किसान मंच

डॉप्लर रडार से बढ़ेगा एंटी हेलगन का प्रभाव 
मंढोल में स्थापित स्वदेशी एंटी हेलगन का प्रयोग सफल रहा है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में एंटी हेलगन का ग्रिड नेटवर्क स्थापित कर सेब की फसल ओलों से बचाई जा सकती है। प्रदेश सरकार को भी इसका प्रस्ताव सौंपा जाएगा। डीआरडीओ की एचईएमआरएल लैब के साथ मिलकर डाॅप्लर रडार स्थापित कर इसका प्रभाव बढ़ाने की भी योजना है।- प्रो. सुदर्शन कुमार, इंस्टीट्यूट चीफ डिपार्टमेंट ऑफ एयरोस्पेस इंजीनियरिंग आईआईटी, मुंबई

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