पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी को लेकर आईओसी के कार्यकारी निदेशक का बड़ा बयान
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इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के कार्यकारी निदेशक सुबोध डाकवाले ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का समर्थन किया है। सोमवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाए। इससे पूरे देश में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स एक समान हो जाएगा। उन्होंने इसी वित्तीय वर्ष के दौरान ऊना में टर्मिनल का निर्माण कार्य पूरा करने का संकेत दिया।
उन्होंने बताया कि देशभर में वर्ष 2020 तक बीएस छह स्तर का ईंधन शुरू हो जाएगा। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि ऊना में करीब 507 करोड़ के निवेश से स्थापित किया जा रहा अत्याधुनिक टर्मिनल पेट्रोल-डीजल और केरोसिन सहित 87 हजार किलोलीटर पेट्रोलियम उत्पादों की संभाल करेगा।
कमिशनिंग के बाद टर्मिनल भारतीय रक्षा बलों के लिए लेह और लद्दाख में वार्षिक शीतकालीन ईंधन भंडारण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रणनीतिक भंडारण स्थल बन जाएगा। इससे हिमाचल प्रदेश को भी कई तरीकों से लाभ प्राप्त होगा।
टर्मिनल कर्मियों और परिवहन चालक दल के लिए हैंडलिंग, लोडिंग और अनलोडिंग के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने बताया कि देशभर में 27 हजार पेट्रोल पंपों में बिजली बचाने के लिए 8800 पंपों को सोलर एनर्जी से लैस किया गया है। देश में 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन में से आधे आईओसी दे रहा है।
प्रदेश के 93 गांव पूर्णत: एलपीजी युक्त
उन्होंने बताया कि राज्य में एलपीजी की भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए 600-600 मेगावाट के दो माउंडिड स्टोरेज स्थापित कर ऊना बाटलिंग प्लांट की स्टोरेज क्षमता 900 मीट्रिक टन से बढ़कर 2100 मीट्रिक टन तक करने का प्रस्ताव है।
परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 22 करोड़ रुपये है। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इसे 2020 तक चालू करने के प्रयास हैं। हिमाचल में 151 एलपीजी पंचायतें स्थापित की गई हैं। एक दिन में ही 5600 एलपीजी कनेक्शन दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 93 गांव चुने गए गए हैं, जो पूर्णत: एलपीजी युक्त हो गए हैं।