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Shimla News: गेयटी में रंगों और रेखाओं से दिखाई भारतीय लोक संस्कृति
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महिला चित्रकारों की मंडला और मधुबनी आर्ट की कलाकृतियां कर रही लोगों को आकर्षित
चित्रों में दिखाई हैं लोक परंपराएं और गांवों का जीवन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में शुक्रवार को चित्रकला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी में रंगों, रेखाओं और पारंपरिक कला का खूबसूरत संगम देखने को मिल रहा है। यहां मंडला आर्ट और मधुबनी आर्ट की कलाकृतियां दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। चित्रों में लोक परंपराओं और गांवों का जीवन भी दर्शाया है।
तीन नवंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में मुंबई की रिंकी वानमोर और उत्तराखंड की पुष्पा मंडल की बनाई कलाकृतियां प्रदर्शित की हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक है। इसके अलावा इंडियन फोक आर्ट और रेजिन आर्ट की कलाकृतियां भी कला प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं।प्रदर्शनी में मंडला आर्ट की बारीक कारीगरी और रंगों का अनूठा तालमेल खास तौर पर देखने को मिल रहा है। इस कला में वृत्ताकार आकृतियों, ज्यामितीय डिजाइनों और एक-दूसरे से जुड़ी सूक्ष्म रेखाओं के माध्यम से आकर्षक पैटर्न तैयार किए जाते हैं। केंद्र से बाहर की ओर बढ़ती आकृतियां संतुलन, एकाग्रता और समरूपता का भाव प्रस्तुत करती हैं।
चित्रकार रिंकी वानमोर ने बताया कि मंडला आर्ट की खासियत इसकी बारीक कारीगरी है। इसमें छोटी-से-छोटी आकृति को भी बेहद सूक्ष्मता से उकेरकर पूरी कलाकृति का रूप दिया जाता है। वहीं मधुबनी आर्ट में पारंपरिक भारतीय लोकजीवन, प्रकृति, देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और धार्मिक प्रसंगों को रंगों और विशिष्ट रेखांकन के माध्यम से दर्शाया जाता है। उत्तराखंड की चित्रकार पुष्पा मंडल ने बताया कि मधुबनी आर्ट की पहचान गहरे रंगों, दोहरी रेखाओं और खाली स्थानों को भी आकर्षक डिजाइनों से भरने की अनूठी शैली से होती है। प्रदर्शनी में इंडियन फोक आर्ट के माध्यम से देश की विभिन्न लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं की झलक भी देखने को मिल रही है।
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चित्रों में दिखाई हैं लोक परंपराएं और गांवों का जीवन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में शुक्रवार को चित्रकला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी में रंगों, रेखाओं और पारंपरिक कला का खूबसूरत संगम देखने को मिल रहा है। यहां मंडला आर्ट और मधुबनी आर्ट की कलाकृतियां दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। चित्रों में लोक परंपराओं और गांवों का जीवन भी दर्शाया है।
तीन नवंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में मुंबई की रिंकी वानमोर और उत्तराखंड की पुष्पा मंडल की बनाई कलाकृतियां प्रदर्शित की हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक है। इसके अलावा इंडियन फोक आर्ट और रेजिन आर्ट की कलाकृतियां भी कला प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं।प्रदर्शनी में मंडला आर्ट की बारीक कारीगरी और रंगों का अनूठा तालमेल खास तौर पर देखने को मिल रहा है। इस कला में वृत्ताकार आकृतियों, ज्यामितीय डिजाइनों और एक-दूसरे से जुड़ी सूक्ष्म रेखाओं के माध्यम से आकर्षक पैटर्न तैयार किए जाते हैं। केंद्र से बाहर की ओर बढ़ती आकृतियां संतुलन, एकाग्रता और समरूपता का भाव प्रस्तुत करती हैं।
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चित्रकार रिंकी वानमोर ने बताया कि मंडला आर्ट की खासियत इसकी बारीक कारीगरी है। इसमें छोटी-से-छोटी आकृति को भी बेहद सूक्ष्मता से उकेरकर पूरी कलाकृति का रूप दिया जाता है। वहीं मधुबनी आर्ट में पारंपरिक भारतीय लोकजीवन, प्रकृति, देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और धार्मिक प्रसंगों को रंगों और विशिष्ट रेखांकन के माध्यम से दर्शाया जाता है। उत्तराखंड की चित्रकार पुष्पा मंडल ने बताया कि मधुबनी आर्ट की पहचान गहरे रंगों, दोहरी रेखाओं और खाली स्थानों को भी आकर्षक डिजाइनों से भरने की अनूठी शैली से होती है। प्रदर्शनी में इंडियन फोक आर्ट के माध्यम से देश की विभिन्न लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं की झलक भी देखने को मिल रही है।
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