{"_id":"d584ef2bbac157af2259702558d8a772","slug":"indian-army-on-border-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरहद पर जवानों को गर्मी देगा थर्मल हीटिंग सिस्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरहद पर जवानों को गर्मी देगा थर्मल हीटिंग सिस्टम
मनु शर्मा/अमर उजाला, मनाली (कुल्लू)
Updated Sun, 19 Oct 2014 03:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सैन्य वैज्ञानिकों ने ऐसा उपकरण डिजाइन किया है जिससे भारत के ठंडे क्षेत्रों में गर्मी और गर्म क्षेत्रों में वातावरण सामान्य रखने में मदद मिलेगी। ये तकनीक सियाचिन और रेगिस्तान जैसे बार्डर एरिया में देश की रक्षा करने वाले जवानों के लिए लाभ दायक सिद्ध होगी।
विज्ञापन
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने मनाली स्थित हिमअवधाव एवं अध्ययन संस्थान में जियो थर्मल नामक ये स्पेस हीटिंग सिस्टम तैयार किया है।
विज्ञापन
मनाली सासे में इस तकनीक का निर्माण किया गया है, जिसकी क्षमता 110 किलोवाट है। इसकी लागत दो करोड़ रुपये है। डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल अनिल दतार ने शनिवार को मनाली में इस हीटिंग सिस्टम का विधिवत उद्घाटन किया है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ये देश में विकसित पहली तकनीक है जिसमें थर्मल तकनीक को इस्तेमाल किया गया है। इससे 70 प्रतिशत ऊर्जा और ईंधन की बचत होगी।डीआरडीओ के प्रोजेक्ट इंचार्ज व वैज्ञानिक डा. जेसी कपिल ने बताया कि इस तकनीक में धरती के नीचे तापमान सामान्य रहने से ईंधन एवं ऊर्जा की बचत होगी तथा ठंडा तापमान गरम होगा व अधिक गर्मी होने पर तापमान सामान्य रहेगा।
कैसे काम करेगी तकनीक
जमीन के भीतर लगभग 50 मीटर नीचे से पानी निकाला जाएगा। इंटर मीडिएट हीट एक्सचेंजर के इस्तेमाल से इसे जरूरत के अनुसार ठंडा या गर्म करके हीटिंग या कुलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।