इस सुरंग से चीन में दाखिल होंगे भारतीय सैनिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किन्नौर से चीन अधिकृत तिब्बत बॉर्डर तक आसानी से पहुंच बनाने के लिए बीआरओ खाब दर्रे को भेदकर टनल बनाने जा रहा है। इस टनल की लंबाई 3.5 किलोमीटर होगी। इस टनल के बनने से सेना और आम लोगों को नाको और मलिंग से होकर नहीं जाना पड़ेगा।
स्पीति नदी के दूसरी ओर से सीधे जागों पहुंचा जा सकेगा। इस टनल के किन्नौर से तिब्बत बॉर्डर की दूरी लगभग 50 किलोमीटर कम हो जाएगी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने टनल निर्माण की औपचारिकताएं पूरी कर प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया है।
बीआरओ के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर एसके कटारिया के मुताबिक बीआरओ ने टनल निर्माण की औपचारिकताएं पूरी करके प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। इसके बाद टनल की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होगी।
बेहतर विकल्प बनेगी टनल
बीआरओ इस टनल का निर्माण इसलिए भी करना चाहता है क्योंकि नाको और मलिंग मार्ग पर लगातार भूस्खलन होता रहता है। इससे मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है। बारिश और बर्फबारी के चलते पहाड़ियां खिसक रही हैं। ऐसे में टनल इसका बेहतर विकल्प है।
1850 में बना हिंदुस्तान तिब्बत मार्ग
1850 में बनना शुरू हुआ हिंदुस्तान तिब्बत मार्ग अंबाला से स्पीति के कौरिक गांव तक है। कालका से वांगतू तक 335 किलोमीटर मार्ग लोनिवि के अधीन है जबकि उसके आगे कौरिक तक इस सड़क की देखरेख का जिम्मा बीआरओ के पास है।