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इस कमेटी से हरी झंडी के बाद ही बागवानों को दिए जाएंगे विदेशी पौधे

Fri, 16 Nov 2018 12:22 PM IST
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 16 Nov 2018 12:22 PM IST
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imported plants of apple to farmers in himachal pradesh by state govt

केंद्र  सरकार की गठित क्वारेंटाइन (संगरोधन) कमेटी से हरी झंडी मिलने के बाद ही बागवानों को विदेशों से आयातित फलों के पौधों की आपूर्ति की जाएगी। प्रदेश के हजारों बागवानों को विदेशों में फल पौधों में पनप रही बीमारियों से न जूझना पड़े, इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने यह व्यवस्था की है। राज्य में विश्व बैंक की वित्तीय मदद से राज्य के विभिन्न भागों में बागवानी विकास प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

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विदेशों से आयातित सेब और अन्य फल पौधे एक साल तक कमेटी की निगरानी में रहेंगे। इस दौरान यह कमेटी बारीकी से विदेशों से आयातित फल पौधों पर निगरानी रखेगी कि कहीं पौधों के साथ विदेशों में पनप रही बीमारी या कोई वायरस तो नहीं पहुंच रहा। इस कमेटी के अलावा राज्य के बागवानी विभाग और बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी आयातित पौधों पर पैनी नजर रखेंगे।
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आयातित पौधों पर नजर रखने को बनी है क्वारेंटाइन कमेटी
केंद्र सरकार ने विदेशों से आयात होने वाले फलदार पौधों खासकर सेब के पौधों पर कड़ी नजर रखने को क्वारेंटाइन कमेटी गठित की है। यह कमेटी आयातित फलदार पौधों पर करीब एक साल तक अपनी निगरानी में रखती है और इसके बाद संबंधित विश्वविद्यालयों और बागवानी विभाग को दिया जाता है, जहां पुन: बीमारियों और वायरस की जांच की जाती है। स्वस्थ पौधे ही बगीचों में लगाने के लिए दिया जाएगा।  
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पौने 1.20 लाख आयातित पौधे देने का लक्ष्य
बागवानी विकास प्रोजेक्ट के तहत पूर्व कांग्रेस सरकार के सत्ता में रहते हुए करीब 45 हजार पौधे बागवानों को दिए गए थे जबकि इस साल करीब 1.20 लाख पौधे देने का लक्ष्य रखा गया है।


क्या कहते हैं प्रोजेक्ट डायरेक्टर
विश्व बैंक की मदद से चलाए जा रहे बागवानी विकास प्रोजेक्ट डायरेक्टर दिनेश मल्होत्रा बताते हैं कि हिमाचल के लिए आयात किए जा रहे फलों के पौधों की एक साल तक क्वारेंटाइन कमेटी निगरानी करती है। पौधे बीमारी और वायरस मुक्त होने पर ही राज्य को दिए जाते हैं। इसके बाद विभाग और बागवानी विश्वविद्यालय अपने स्तर पर जांच कर संतुष्ट होने पर पौधों की आपूर्ति करता है।

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