{"_id":"6985f9bc17f3db0e8f071197","slug":"illegal-shops-and-eateries-will-be-removed-from-hpu-notices-issued-shimla-news-c-19-sml1002-673961-2026-02-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: एचपीयू से अवैध दुकाने और \nढाबे हटेंगे, नोटिस किए जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: एचपीयू से अवैध दुकाने और ढाबे हटेंगे, नोटिस किए जारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नौ दुकानदारों को कब्जे छोड़ने के निर्देश
अवैध कब्जा धारक बोले, अब कहां जाकर करें कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने कथित रूप से किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई नौ दुकानदारों और ढाबा संचालकों पर होगी। इसे लेकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने नोटिस दिए हैं।
तीन दिन के अंदर विश्वविद्यालय परिसर से कब्जे हटाने के लिए कहा है। इससे पहले भी पिछले साल जुलाई में संबंधित पक्ष को कब्जा खाली करने के निर्देश दिए थे लेकिन कई महीनों बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह भूमि संस्थान की संपत्ति है और बिना अनुमति किसी भी तरह का निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि नियमों के खिलाफ है। यदि तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के बाद विवि परिसर और उसके आसपास करीब 13 वर्षों से काम कर रहे दुकानदारों और ढाबा संचालकों में चिंता का माहौल है। स्थानीय स्तर पर यह छोटे कारोबारी छात्रों, कर्मचारियों और राहगीरों के लिए सस्ती तथा आसान दरों पर भोजन आदि की सेवाएं उपलब्ध कराते रहे हैं। समय के साथ यह अस्थायी ढांचे स्थायी स्वरूप लेने लगे और अब विश्वविद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया है। विश्वविद्यालय का तर्क है कि अतिक्रमण से न केवल संस्थान की भूमि का दायरा सिमट रहा है बल्कि सुरक्षा यातायात और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ढाबों के आसपास न ही सफाई है और न ही कचरा प्रबंधन की सुविधा। साथ ही ढाबों में पानी और बिजली की व्यवस्था भी नहीं है।
विज्ञापन
दुकानदारों का कहना है कि वह लंबे समय से यहां कारोबार कर रहे हैं और उनकी पूरी आजीविका इसी पर निर्भर है। इनका दावा है कि पहले भी कई बार यह बात उठी थी कि वेंडरों के लिए नीति बनाई जाएगी और उनसे किराया लेकर उन्हें नियमित किया जाएगा लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। अब अचानक कार्रवाई की बात सामने आने से इन कारोबारियों के परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट में पड़ गई है।
कोट
कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने कारोबारियों को पहले भी कई बार नोटिस दिया है। यदि तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तेरह साल से यहीं चल रहा है कारोबार
अमित का कहना है कि वह पिछले 13 सालों से इसी जगह पर कारोबार कर रहे हैं। इनका पूरा परिवार इसी दुकानदारी पर निर्भर है। उन्होंने विवि प्रबंधन से आग्रह किया कि उन्हें उजाड़ने की जगह उनसे किराया लेकर कारोबार करने की अनुमति दें। अमित का कहना है कि यदि विवि प्रशासन कोई नियम बनाकर किराया लेने को तैयार हो तो अधिकतर वेंडर इसके लिए तैयार हैं। अचानक हटाने की कार्रवाई से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
शहरभर में समान नियम हों लागू
शिवांशी सूद नौ सालों से एक छोटा ढाबा चला रही हैं और दो बच्चों की एकल मां हैं। वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ चुकी हैं और उपचार के बाद परिवार की जिम्मेदारी अकेले ही संभाल रही हैं। उन्होंने बताया कि यही ढाबा उनके बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का एकमात्र सहारा है। शिवांशी का मानना है कि यदि नियम लागू करने हैं तो पूरे शहर में सभी स्ट्रीट वेंडरों के लिए समान होने चाहिए। किसी एक जगह चुनिंदा पर कार्रवाई करना सही नहीं है। सभी के लिए स्पष्ट नीति बनाई बनाकर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन
अवैध कब्जा धारक बोले, अब कहां जाकर करें कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने कथित रूप से किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई नौ दुकानदारों और ढाबा संचालकों पर होगी। इसे लेकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने नोटिस दिए हैं।
तीन दिन के अंदर विश्वविद्यालय परिसर से कब्जे हटाने के लिए कहा है। इससे पहले भी पिछले साल जुलाई में संबंधित पक्ष को कब्जा खाली करने के निर्देश दिए थे लेकिन कई महीनों बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह भूमि संस्थान की संपत्ति है और बिना अनुमति किसी भी तरह का निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि नियमों के खिलाफ है। यदि तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
कार्रवाई के बाद विवि परिसर और उसके आसपास करीब 13 वर्षों से काम कर रहे दुकानदारों और ढाबा संचालकों में चिंता का माहौल है। स्थानीय स्तर पर यह छोटे कारोबारी छात्रों, कर्मचारियों और राहगीरों के लिए सस्ती तथा आसान दरों पर भोजन आदि की सेवाएं उपलब्ध कराते रहे हैं। समय के साथ यह अस्थायी ढांचे स्थायी स्वरूप लेने लगे और अब विश्वविद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया है। विश्वविद्यालय का तर्क है कि अतिक्रमण से न केवल संस्थान की भूमि का दायरा सिमट रहा है बल्कि सुरक्षा यातायात और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ढाबों के आसपास न ही सफाई है और न ही कचरा प्रबंधन की सुविधा। साथ ही ढाबों में पानी और बिजली की व्यवस्था भी नहीं है।
विज्ञापन
दुकानदारों का कहना है कि वह लंबे समय से यहां कारोबार कर रहे हैं और उनकी पूरी आजीविका इसी पर निर्भर है। इनका दावा है कि पहले भी कई बार यह बात उठी थी कि वेंडरों के लिए नीति बनाई जाएगी और उनसे किराया लेकर उन्हें नियमित किया जाएगा लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। अब अचानक कार्रवाई की बात सामने आने से इन कारोबारियों के परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट में पड़ गई है।
कोट
कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने कारोबारियों को पहले भी कई बार नोटिस दिया है। यदि तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तेरह साल से यहीं चल रहा है कारोबार
अमित का कहना है कि वह पिछले 13 सालों से इसी जगह पर कारोबार कर रहे हैं। इनका पूरा परिवार इसी दुकानदारी पर निर्भर है। उन्होंने विवि प्रबंधन से आग्रह किया कि उन्हें उजाड़ने की जगह उनसे किराया लेकर कारोबार करने की अनुमति दें। अमित का कहना है कि यदि विवि प्रशासन कोई नियम बनाकर किराया लेने को तैयार हो तो अधिकतर वेंडर इसके लिए तैयार हैं। अचानक हटाने की कार्रवाई से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
शहरभर में समान नियम हों लागू
शिवांशी सूद नौ सालों से एक छोटा ढाबा चला रही हैं और दो बच्चों की एकल मां हैं। वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ चुकी हैं और उपचार के बाद परिवार की जिम्मेदारी अकेले ही संभाल रही हैं। उन्होंने बताया कि यही ढाबा उनके बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का एकमात्र सहारा है। शिवांशी का मानना है कि यदि नियम लागू करने हैं तो पूरे शहर में सभी स्ट्रीट वेंडरों के लिए समान होने चाहिए। किसी एक जगह चुनिंदा पर कार्रवाई करना सही नहीं है। सभी के लिए स्पष्ट नीति बनाई बनाकर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।