फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   IIT mandi researchers make satellite surveillance system

सैटेलाइट से देश की निगरानी करने का रक्षा तंत्र होगा मजबूत, आईआईटी के शोधकर्ताओं ने ईजाद की तकनीकी

Mon, 24 Aug 2020 05:17 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 24 Aug 2020 05:17 PM IST
विज्ञापन
IIT mandi researchers make satellite surveillance system
- फोटो : अमर उजाला

सैटेलाइट से देश की निगरानी करने का रक्षा तंत्र अधिक मजबूत होगा। चीन के साथ चल रही तनातनी के बीच आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने गणित मॉडल का इस्तेमाल कर सैटेलाइट और विभिन्न इमेजिंग सिस्टम के इमेज की गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीक ईजाद की है। इसमें इमेज एक इलास्टिक शीट के रूप में दिखाई देगी। इसे दबाने पर स्पेकल्स यानी जूम या अंधेरे में आने वाले धब्बे दूर होंगे।

विज्ञापन


इमेज काफी हद तक साफ दिखेगी। इस कार्य के परिणाम सोसायटी फॉर इंडस्ट्रियल एंड एप्लाइड मैथेमेटिक्स (एसआईएएम) जर्नल ऑफ इमेजिंग साइंसेज में प्रकाशित किए हो चुके हैं। आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रो डॉ. राजेंद्र कुमार रे के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने स्पेकल्स को दूर करने के लिए गणितीय विधियों का उपयोग किया। उन्होंने बताया कि शोधकर्ताओं ने गणित मॉडल इस्तेमाल कर विभिन्न इमेजिंग सिस्टम के इमेज की गुणवत्ता बढ़ाई है। इसमें चिकित्सा, सैन्य तथा अन्य क्षेत्रों में सैटेलाइट व अन्य स्रोतों की ओर से खींची गईं तस्वीरों को बेहतर ढंग से देखना आसान होगा। 
विज्ञापन


वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रस्तावित तकनीक में डिफ्यूजन इक्वेशन और वेब इक्वेशन के संयुक्त प्रभावों का उपयोग किया जाता है। पार्शियल डिफरेंशियल इक्वेशन (पीडीई) आधारित इस पद्धति के मुख्य लाभों में से एक यह है कि इसका एक मजबूत सैद्धांतिक आधार है, जो किसी नॉन पीडीई आधारित पद्धति के लिए हमेशा निश्चित नहीं होता। डॉ. रे के अनुसार हमारे कैमरे का संचालन फ्लैश मोड में करना एक्टिव इमेजिंग का एक सरल उदाहरण है। जैव-चिकित्सा इमेजिंग यानी एक्सरे, अल्ट्रासाउंड से सैटेलाइट आधारित निगरानी तक उच्च-तकनीकी के कई कार्यों में एक्टिव इमेजिंग का उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्पैक्लस को करेगा दूर
स्पैक्लस की उपस्थिति में कुछ एक्टिव इमेजिंग तकनीकों के उपयोग से उत्पन्न हुए इमेजों की गुणवत्ता कम हो जाती है। स्पेकल्स इमेज में ग्रेन दिखाते हैं, जिसके फलस्वरूप बारीकी का नाश होता है। वे इमेजिंग उपकरण से ही या इमेज कैप्चर, ट्रांसफर अथवा स्टोरेज से संबद्ध बाहरी परिवेश से उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार की प्रणालियों का उपयोग सैन्य निगरानी और चिकित्सा निदान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed