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आईआईटी मंडी के इंजीनियरों ने इजाद की नई तकनीक
कमलेश रतन भारद्वाज/अमर उजाला, मंडी
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:03 AM IST
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आईआईटी मंडी
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प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में नदी या नाले के उस पार जाने के लिए प्रयोग होने वाले झूले अब अत्याधुनिक पैडल और गियर सिस्टम से लैस होंगे। आईआईटी मंडी के इंजीनियरों ने पारंपरिक झूले का आधुनिक मॉडल तैयार किया है। इस पारंपरिक झूलों के आधुनिक मॉडल में कई फीचर हैं।
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इसमें बिना रस्सी खींचे झूलों से नदियों व खड्डों को आर-पार किया जा सकेगा। इस झूले में साइकिल गियर सिस्टम भी प्रस्तावित है, जिस पर आईआईटी के इंजीनियर शोध कर रहे हैं। इसे साइंस एंड टेक्नॉलॉजी मंत्रालय ने सोसायटी फॉर टेक्नालॉजी एंड डेवलपमेंट मंडी को सौंपा है। पारंपरिक झूलों में सुधार के लिए सोसायटी आईआईटी मंडी के साथ मिलकर कर साझा प्रयास कर रही है।
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प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में आज भी झूले नदियों, खड्डों को पार करने का मुख्य साधन हैं। यही नहीं, सेब और सब्जियों को मुख्य सड़कों तक पहुंचाने में इन झूलों का प्रयोग काफी प्रचलन में है। वर्तमान में ये झूले पुरानी तकनीक पर कार्य कर रहे हैं। कई लोग हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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झूलों की रस्सियों में अंगुली व हाथ के कट जाने से हादसे होना तो इन क्षेत्रों में आम सी बात है। इन झूलों के विकसित होने से इनका प्रयोग अधिक सुरक्षित हो पाएगा। आईआईटी मंडी के प्रो. डा. रजनीश शर्मा, डा. राजीव कुमार, डा. कौशत्व सरकार, डा. दीपक स्वामी व पीडब्लयूडी से सेवानिवृत्त इंजीनियर गंगा राम इस कार्य में जुटे हुए हैं।
सोसायटी फॉर टेक्नालॉजी एंड डेवलपमेंट मंडी के निदेशक जोगिंद्र वालिया ने कहा कि इस नए मॉडल में कई फीचर है। दिल्ली में जल्द ही मॉडल को एक वर्कशॉप में प्रदर्शित किया जाएगा। अभी इस मॉडल को और अधिक विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के इंजीनियरिंग संस्थानों के भावी इंजीनियरों से भी सुझाव मांगे जाएंगे। इसके एक कंपीटीशन वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा।