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Shimla: आईजीएमसी रोगी कल्याण समिति की ईसी बैठक में लेगा मरीजों से 10 रुपये परामर्श शुल्क लेने का निर्णय

Fri, 06 Jun 2025 05:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 06 Jun 2025 05:32 PM IST
सार

आईजीएमसी प्रशासन के अनुसार आईजीएमसी में पंजीकरण के समय सभी रोगियों के लिए परामर्श शुल्क के रूप में 10 रुपये लगाने और आवश्यकता के आधार पर अन्य संबंधित उपयोगकर्ता शुल्क लगाने के संबंध में रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की कार्यकारी समिति (ईसी) की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

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IGMC will take a decision to charge consultation fee from patients in the EC meeting of the Rogi Kalyan Samiti
आईजीएमसी शिमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल(आईजीएमसी) शिमला ने पर्ची बनाने के समय मरीजों से 10 रुपये परामर्श शुल्क लेने पर अभी फैसला नहीं लिया है। आईजीएमसी प्रशासन के अनुसार आईजीएमसी में पंजीकरण के समय सभी रोगियों के लिए परामर्श शुल्क के रूप में 10 रुपये लगाने और आवश्यकता के आधार पर अन्य संबंधित उपयोगकर्ता शुल्क लगाने के संबंध में रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की कार्यकारी समिति (ईसी) की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए अंतिम मंजूरी आरकेएस की आम सभा की बैठक (जीबीएम) से मांगी जाएगी।

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बता दें, सरकारी अस्पतालों में मरीजों से पर्ची के 10 रुपये शुल्क वसूलने के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि रोगी कल्याण समिति तय करेगी कि मरीजों से पर्ची के 10 रुपये लेने हैं या नहीं। इस संबंध में सरकार ने कोई संस्तुति नहीं की है। अस्पतालों को स्वायत्त किया गया है। अस्पताल अगर साफ-सफाई और रखरखाव के लिए ऐसा करना चाहते हैं, तो वे 10 रुपये पर्ची का शुल्क लगा सकते हैं। अस्पताल अगर नहीं चाहते हैं और उनके अपने संसाधन हैं तो उन्हें पर्ची शुल्क लेने की जरूरत नहीं है।

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ये अस्पताल की रोगी कल्याण समिति तय करेगी, जिसमें स्थानीय लोग होते हैं। कैबिनेट सब कमेटी ने एक राय के तहत कहा कि सभी अस्पतालों को स्वायत्त होना चाहिए। अस्पतालों की सफाई व्यवस्था, उपकरणों के रखरखाव और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए इस तरह का शुल्क हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में सरकार के पास साफ-सफाई और रखरखाव से जुड़े कुछ सुझाव जरूर आए थे और कैबिनेट की सब कमेटी की भी सिफारिश सामने आई थीं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं लिया।

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