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Shimla News: आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी का शतक, रक्त की जरूरत घटी
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पांच माह में गायनी और सर्जरी विभाग ने किए 100 रोबोटिक ऑपरेशन, रक्तस्राव होता है कम
बाहरी राज्यों और निजी अस्पतालों में खर्च होते हैं हजारों
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में चिकित्सकों ने 100 सफल रोबोटिक सर्जरी पूरी कर ली हैं। खास बात यह है कि जिन मरीजों की रोबोटिक सर्जरी की गई है, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। पांच माह के भीतर आईजीएमसी के गायनी और सर्जरी विभाग ने ये ऑपरेशन किए हैं।
आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से मरीजों को भी सुविधा मिली है। अब मरीजों को रोबोटिक सर्जरी करवाने के लिए एम्स बिलासपुर, चंडीगढ़ और दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। वहीं सामान्य ऑपरेशन की तुलना में इसमें रक्तस्राव भी कम हो रहा है। इससे ऑपरेशन के दौरान रक्त की जरूरत न के बराबर रह गई है। सामान्य ऑपरेशन और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में अतिरिक्त रक्त की जरूरत पड़ती थी। ऐसे में रोबोटिक सर्जरी के लिए मरीजों को बाहरी राज्यों और निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इसके लिए उन्हें लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब आईजीएमसी में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 11 मार्च को आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारंभ किया था। इसके तुरंत बाद चिकित्सकों की टीम ने रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन शुरू कर दिए थे।
30 हजार रुपये में होती है सर्जरी
आईजीएमसी के जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों की रोबोटिक सर्जरी 30 हजार रुपये में होती है। वहीं विशेष वार्ड में भर्ती मरीजों को इसके लिए 50 हजार रुपये शुल्क देना पड़ता है। वहीं आईजीएमसी में 100 रोबोटिक सर्जरी पूरी होने पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चिकित्सकों को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन बताया है।
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बाहरी राज्यों और निजी अस्पतालों में खर्च होते हैं हजारों
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में चिकित्सकों ने 100 सफल रोबोटिक सर्जरी पूरी कर ली हैं। खास बात यह है कि जिन मरीजों की रोबोटिक सर्जरी की गई है, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। पांच माह के भीतर आईजीएमसी के गायनी और सर्जरी विभाग ने ये ऑपरेशन किए हैं।
आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से मरीजों को भी सुविधा मिली है। अब मरीजों को रोबोटिक सर्जरी करवाने के लिए एम्स बिलासपुर, चंडीगढ़ और दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। वहीं सामान्य ऑपरेशन की तुलना में इसमें रक्तस्राव भी कम हो रहा है। इससे ऑपरेशन के दौरान रक्त की जरूरत न के बराबर रह गई है। सामान्य ऑपरेशन और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में अतिरिक्त रक्त की जरूरत पड़ती थी। ऐसे में रोबोटिक सर्जरी के लिए मरीजों को बाहरी राज्यों और निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इसके लिए उन्हें लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब आईजीएमसी में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 11 मार्च को आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारंभ किया था। इसके तुरंत बाद चिकित्सकों की टीम ने रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन शुरू कर दिए थे।
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30 हजार रुपये में होती है सर्जरी
आईजीएमसी के जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों की रोबोटिक सर्जरी 30 हजार रुपये में होती है। वहीं विशेष वार्ड में भर्ती मरीजों को इसके लिए 50 हजार रुपये शुल्क देना पड़ता है। वहीं आईजीएमसी में 100 रोबोटिक सर्जरी पूरी होने पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चिकित्सकों को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन बताया है।
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