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Shimla News: आईजीएमसी ने जनसंख्या के आधार बीमारियों का अध्ययन किया शोध
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मौके पर लगाया जा रहा बीमारियों का पता
सीएम के आदेशों पर किए जा रहे हैं अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में जनसंख्या के आधार बीमारियों पर शोध और अध्ययन करना शुरू कर दिया है। इसमें अस्पताल प्रबंधन और विभाग को सफलता भी मिल गई है।
आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि सीएम सुक्खू ने आदेश दिए थे कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल नहीं चला रहे हैं बल्कि अनुसंधान केंद्र भी चला रहे हैं। इसको देखते हुए चिकित्सक द्वारा मौके पर जाकर बीमारियों का पता लगाया जा रहा है। दो वर्ष पहले पित्ताशय की पथरी का अध्ययन किया गया। यह अध्ययन काफी मायने रखता है। अस्पताल में आने वाले मरीजों से ही अध्ययन नहीं की गई है बल्कि मौके पर जाकर बीमारियों का पता लगाने और उनके निदान के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. पुनीत महाजन ने बताया कि सरकार की ओर से बेहतर कदम उठाया है। इससे दुर्गम और अन्य क्षेत्रों में जाकर लोगों की जांच की जा रही है। शोधकर्ता डॉ. विपिन शर्मा ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र में कुछ परेशानियां जरूर आई हैं। दुर्गम क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड मशीनों को ले जाना ही सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि जहां पर केंद्र बनाए गए थे वहां तक पहुंचने के लिए सड़क भी नहीं थी।
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सीएम के आदेशों पर किए जा रहे हैं अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में जनसंख्या के आधार बीमारियों पर शोध और अध्ययन करना शुरू कर दिया है। इसमें अस्पताल प्रबंधन और विभाग को सफलता भी मिल गई है।
आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि सीएम सुक्खू ने आदेश दिए थे कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल नहीं चला रहे हैं बल्कि अनुसंधान केंद्र भी चला रहे हैं। इसको देखते हुए चिकित्सक द्वारा मौके पर जाकर बीमारियों का पता लगाया जा रहा है। दो वर्ष पहले पित्ताशय की पथरी का अध्ययन किया गया। यह अध्ययन काफी मायने रखता है। अस्पताल में आने वाले मरीजों से ही अध्ययन नहीं की गई है बल्कि मौके पर जाकर बीमारियों का पता लगाने और उनके निदान के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. पुनीत महाजन ने बताया कि सरकार की ओर से बेहतर कदम उठाया है। इससे दुर्गम और अन्य क्षेत्रों में जाकर लोगों की जांच की जा रही है। शोधकर्ता डॉ. विपिन शर्मा ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र में कुछ परेशानियां जरूर आई हैं। दुर्गम क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड मशीनों को ले जाना ही सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि जहां पर केंद्र बनाए गए थे वहां तक पहुंचने के लिए सड़क भी नहीं थी।
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