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हिमाचल: आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं और नन्हे बच्चों को नहीं मिलेगा तेल-शक्कर, पोषण आहार में कटौती
Thu, 10 Sep 2026 09:42 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 10 Sep 2026 09:42 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषण आहार के कोटे में बदलाव किया गया है। अब गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के बच्चों के लिए सरसों के तेल और शक्कर की आपूर्ति बंद कर दी गई है। अचानक हुई इस कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में नाराजगी है।
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आंगनबाड़ी केंद्र (सांकेतिक फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के नन्हे बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार के कोटे में कटौती कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन लाभार्थी श्रेणियों के लिए मिलने वाले सरसों के तेल और शक्कर की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से बंद कर दी है।
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नई व्यवस्था के तहत अब आंगनबाड़ी केंद्रों में सरसों के तेल और शक्कर का इस्तेमाल केवल तीन से छह वर्ष तक के नियमित रूप से केंद्र आने वाले बच्चों के लिए खाना पकाकर परोसने में किया जाएगा। यानी गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार में अब तेल और शक्कर शामिल नहीं होंगे।
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अचानक बदलाव से महिलाओं में नाराजगी
तेल और शक्कर का आवंटन अचानक रोके जाने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। लाभार्थी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लगातार सवाल कर रही हैं कि जब अन्य राशन और पोषण सामग्री दी जा रही है तो तेल और शक्कर की आपूर्ति क्यों बंद की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने भी लाभार्थियों के सवालों का जवाब देने की चुनौती खड़ी हो गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाएं इस बदलाव को लेकर लगातार जानकारी मांग रही हैं।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन की जिला प्रधान सुदेश कुमारी और महासचिव लज्या ठाकुर ने बताया कि महिलाओं में इस फैसले को लेकर सवाल हैं। उनका कहना है कि लाभार्थी पूछ रही हैं कि जब पोषण आहार में अन्य राशन दिया जा रहा है तो तेल और शक्कर की कटौती किस आधार पर की गई है।
पहले सफेद चीनी की जगह शुरू की थी देसी शक्कर
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए निर्धारित राशन और पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। कुछ समय पहले ही पोषण स्तर में सुधार के उद्देश्य से विभाग ने सफेद चीनी की जगह देसी शक्कर देना शुरू किया था। ऐसे में अब तेल और शक्कर की आपूर्ति बंद होने से लाभार्थियों के बीच इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पोषण आहार में बदलाव को लेकर जानकारी मांग रही हैं।
निदेशालय और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार होता है बदलाव
धर्मशाला खंड के बाल विकास परियोजना अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले राशन और पोषण सामग्री के मेन्यू में बदलाव निदेशालय और केंद्र सरकार के स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है। नई व्यवस्था के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के नियमित रूप से आने वाले बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में तेल और शक्कर का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के बच्चों के पोषण आहार में इन दोनों सामग्री की आपूर्ति बंद कर दी गई है।
फिलहाल, इस बदलाव को लेकर लाभार्थियों में नाराजगी है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी महिलाओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। पोषण आहार की व्यवस्था में हुए इस बदलाव का असर आने वाले दिनों में किस तरह दिखाई देता है, इस पर भी लाभार्थियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नजर रहेगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए निर्धारित राशन और पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। कुछ समय पहले ही पोषण स्तर में सुधार के उद्देश्य से विभाग ने सफेद चीनी की जगह देसी शक्कर देना शुरू किया था। ऐसे में अब तेल और शक्कर की आपूर्ति बंद होने से लाभार्थियों के बीच इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पोषण आहार में बदलाव को लेकर जानकारी मांग रही हैं।
निदेशालय और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार होता है बदलाव
धर्मशाला खंड के बाल विकास परियोजना अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले राशन और पोषण सामग्री के मेन्यू में बदलाव निदेशालय और केंद्र सरकार के स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है। नई व्यवस्था के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के नियमित रूप से आने वाले बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में तेल और शक्कर का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के बच्चों के पोषण आहार में इन दोनों सामग्री की आपूर्ति बंद कर दी गई है।
फिलहाल, इस बदलाव को लेकर लाभार्थियों में नाराजगी है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी महिलाओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। पोषण आहार की व्यवस्था में हुए इस बदलाव का असर आने वाले दिनों में किस तरह दिखाई देता है, इस पर भी लाभार्थियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नजर रहेगी।