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Shimla News: वन्यजीव बचेंगे तो आजीविका भी सुरक्षित रहेगी
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वन्यजीव सप्ताह में विशेषज्ञों ने संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर किया मंथन
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ हुए शामिल
अनुसंधान को वन्यजीव संरक्षण की मजबूत नींव बताया
गिद्ध संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। वन्यजीव सप्ताह के सातवें दिन वन मुख्यालय शिमला में सेमिनार-कम-वेबिनार आयोजित किया गया। वन विभाग के वन्यप्राणी प्रभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, वन्यजीव विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद, प्रधान मुख्य अरण्यपाल एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन आलोक प्रेम नागर, मुख्य अरण्यपाल एवं अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यजीव के. थिरूमल, हिमाचल प्रदेश वन निगम के निदेशक (दक्षिण) कृष्ण कुमार और अरण्यपाल (वन्यजीव) शिमला प्रीति भंडारी मौजूद रहीं। विभिन्न वन वृत्तों के अरण्यपाल, वन मंडल अधिकारी और अन्य प्रतिभागियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
कार्यक्रम में हिमाचल की वन्यजीव, वनस्पति और जैव विविधता के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। इस दौरान कहा गया कि वन्यजीव बचेंगे तो आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।
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अनुसंधान को संरक्षण की मजबूत नींव बताया
अक्षता ने वन्यजीव संरक्षण में अनुसंधान की भूमिका और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। मलयसरी ने गिद्ध संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। जेडएसआई कोलकाता के वैज्ञानिक-ई डॉ. ललित कुमार शर्मा, आईसीएफआरई-एचएफआरआई की वैज्ञानिक-ई डॉ. रंजना नेगी और सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिष्टू ने प्रदेश में मौजूद समृद्ध वनस्पति विविधता और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
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वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ हुए शामिल
अनुसंधान को वन्यजीव संरक्षण की मजबूत नींव बताया
गिद्ध संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। वन्यजीव सप्ताह के सातवें दिन वन मुख्यालय शिमला में सेमिनार-कम-वेबिनार आयोजित किया गया। वन विभाग के वन्यप्राणी प्रभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, वन्यजीव विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद, प्रधान मुख्य अरण्यपाल एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन आलोक प्रेम नागर, मुख्य अरण्यपाल एवं अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यजीव के. थिरूमल, हिमाचल प्रदेश वन निगम के निदेशक (दक्षिण) कृष्ण कुमार और अरण्यपाल (वन्यजीव) शिमला प्रीति भंडारी मौजूद रहीं। विभिन्न वन वृत्तों के अरण्यपाल, वन मंडल अधिकारी और अन्य प्रतिभागियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
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कार्यक्रम में हिमाचल की वन्यजीव, वनस्पति और जैव विविधता के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। इस दौरान कहा गया कि वन्यजीव बचेंगे तो आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।
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अनुसंधान को संरक्षण की मजबूत नींव बताया
अक्षता ने वन्यजीव संरक्षण में अनुसंधान की भूमिका और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। मलयसरी ने गिद्ध संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। जेडएसआई कोलकाता के वैज्ञानिक-ई डॉ. ललित कुमार शर्मा, आईसीएफआरई-एचएफआरआई की वैज्ञानिक-ई डॉ. रंजना नेगी और सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिष्टू ने प्रदेश में मौजूद समृद्ध वनस्पति विविधता और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।