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सेब को स्कैब रोग से नहीं बचाया तो टूट जाएगी बागवानों की कमर

Thu, 16 Jul 2020 11:53 AM IST
Krishan Singh विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 16 Jul 2020 11:53 AM IST
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If the apple is not saved from scab disease then the back of the gardeners will be broken
सेब पर स्कैब रोग ने हमला - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल में सेब बहुल क्षेत्रों में स्कैब रोग ने हमला बोल दिया है। इससे बागवान संकट में हैं। समय रहते सरकार ने कोई कारगर कदम नहीं उठाए तो बागवानों का करीब 4500 करोड़ का सेब कारोबार प्रभावित हो सकता है। साढ़े तीन दशक पहले भी प्रदेश में सेब पर स्कैब से बुरी मार पड़ चुकी है। प्रदेश में अभी तक ऊंचाई वाले इलाकों के सेब पर ही इस रोग की मार थी, अब निचले क्षेत्रों में भी इस बीमारी ने सेब को जकड़ लिया है। शिमला, कुल्लू, मंडी, सिरमौर और चंबा के सेब पर स्कैब का प्रकोप है। 

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वर्ष 1983-84 में भी सेब की फसल पर स्कैब की मार ने बागवानों को झकझोर दिया था। शिमला जिले में सबसे ज्यादा सेब पैदा किया जाता है और स्कैब की सबसे ज्यादा मार भी इसी जिले में पड़ रही है। जिले के रोहड़ू, जुब्बल कोटखाई क्षेत्र के अलावा कम ऊंचाई वाले इलाकों में भी सेब तबाह हो रहा है। यही स्थिति मंडी और कुल्लू के सेब बगीचों में बनी हुई है। हिमाचल सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि स्कैब पर काबू नहीं पाया तो वर्ष 1984 वाली स्थिति पैदा हो सकती है। बागवानों को सस्ती दवाएं दी जाएं। 

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वैज्ञानिकों की कमेटी रखेगी नजर

प्रदेश सरकार ने बागवानी विभाग के अधिकारियों और नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की कमेटी बना दी है। यह कमेटी पांचों जिलों में सेब पर स्कैब के रोग पर निगरानी रखेगी। कमेटी हर हफ्ते सरकार को अपनी रिपोर्ट देती रहेगी। 

क्या कहते हैं बागवानी निदेशक
प्रदेश के बागवानी निदेशक केसी आजाद कहते हैं कि राज्य के पांच जिलों शिमला, कुल्लू, मंडी, सिरमौर और चंबा के सेब पर स्कैब रोग की शिकायतें आई हैं। सरकार ने कमेटी बनाकर स्कैब पर बराबर निगरानी रखने को कहा है। कमेटी बागवानों को दवाओं के छिड़काव को लेकर सुझाव भी देती रहेगी। 

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