युवा आईएएस ने कायम की मिसाल, समाज सेवा के लिए छोड़ दी नौकरी
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उम्र में आईएएस की नौकरी छोड़ने वाले डॉ. प्रेम सिंह इसी मंत्र को मानते हैं। लाहौल में जाहलमा के इस युवा आईएएस अफसर ने देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ कार्मिक मंत्रालय और मणिपुर राज्यपाल को को इस्तीफा दे दिया है।
मणिपुर कैडर के यह अधिकारी डेपुटेशन पर नीति आयोग में तैनात थे। मणिपुर त्रिपुरा कैडर के 2000 बैच के अफसर डॉ. प्रेम सिंह नौकरी छोड़ते समय ज्वाइंट सेक्रेटरी रैंक पर थे। जबकि फिलहाल वे नीति आयोग भारत सरकार में डेपुटेशन पर थे।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर देश की सेवा करने के उनके जुनून ने उन्हें नौकरी से इस्तीफा देने की प्रेरणा दी। सोशल मीडिया फेसबुक में डॉ. प्रेम सिंह ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। वे दसवीं कक्षा तक लाहौल स्पीति के सरकारी स्कूल जाहलमा में पढ़े हैं।
ये होगा अगला मिशन
एमबीबीएस जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च पुडुचेरी से की। प्रेम सिंह हिमाचल प्रदेश के पहले आईएएस अधिकारी हैं जो लगातार पांच साल तक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में नए आईएएस अफसरों को पढ़ाते रहे।
सिविल सर्विस की बारीकियों को कुशलता से समझाते थे। प्रेम सिंह लाहौल घाटी में जहालमा गांव के रहने वाले है। वहीं, डॉ प्रेम सिंह का यह निर्णय लाहौल घाटी में चर्चा का विषय बन गया है।
एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त डॉ. प्रेम सिंह ने समाज सेवा को अपना अगला मिशन बनाया है। उनकी कार्ययोजना में बच्चों की शिक्षा प्राथमिकता है। ग्रामीण इलाकों में वह बतौर डॉक्टर सेवाएं देने की तैयारी में हैं।
खासकर दूरदराज इलाकों में इलाज करने की सोची है। वहीं, शीत मरुस्थल कहे जाने वाले लाहौल-स्पीति में प्रशासनिक सेवाओं के लिए विद्यार्थियों को कोचिंग भी देना चाहते हैं।