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अफसर के संघर्ष ने बचा लीं बेटियां, देशभर के लिए बने मिसाल

Sat, 06 Feb 2016 04:50 PM IST
Updated Sat, 06 Feb 2016 04:50 PM IST
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IAS officer abhishek jain campaign for save girl child in himachal.

...बात 2011 की है जब कम हो रही बेटियों के एक चिंताजनक आंकड़े ने देश में तहलका मचा दिया। हिमाचल के जिला ऊना में बतौर डीसी 1000 लड़कों के पीछे 875 लड़कियों के आंकड़े ने न केवल सोचने को मजबूर किया, बल्कि जवाबदेही भी तय हो गई।

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जिले में शिशु लिंगानुपात के गिरते आंकड़ों से प्रदेश उस वक्त देश के दस संवेदनशील राज्यों की श्रेणी में पहुंच गया। सुप्रीमकोर्ट समेत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को नोटिस दिया। युवा आईएस अधिकारी अभिषेक जैन कहते हैं कि इस चुनौती से उबरना आसान नहीं था।
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ऊना के माथे से इस कलंक को धोने के लिए सबसे पहले प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व का मार्गदर्शन मिला। योजनाबद्ध तरीके से धरातल पर काम से आज हम 0-6 वर्ष के बच्चों में 900 लिंगानुपात के आंकड़े पर हैं। अगर अभियान की सफलता यूं ही जारी रही तो 2021 में होने वाली जनगणना में 937 के आंकड़े को क्रॉस कर लेंगे।

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मेनका गांधी ने भी की तारीफ

IAS officer abhishek jain campaign for save girl child in himachal.

केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने भी बेटी बचाओ अभियान के लिए ऊना की प्रशंसा की है। जयपुर में पिछले दिनों पीआईपी की ओर से आयोजित क्षेत्रीय संपादक सम्मेलन में मेनका ने कहा कि इस अभियान के उत्साहित होकर ही केंद्र ने देश में 61 अन्य जिलों में यह अभियान शुरू करने का फैसला किया है।

दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा बना ऊना
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की निर्धारित लक्ष्य से कम समय में सफलता के चलते जिला ऐसे राज्यों के लिए उदाहरण बन गया है, जहां बेटियों का अनुपात कम है। जिले में यह लक्ष्य 217 के मुकाबले 2015 में 25 प्वाइंटस की बढ़ोतरी के साथ भेदा गया। सरकार ने अभियान पर लगभग 20 लाख रुपये खर्चे।

गुड्डा-गुड्डी बोर्ड से ठनका माथा

पंचायत स्तर पर गुड्डा-गुड्डी बोर्ड लगवाए। इसमें पंचायत में पैदा होने वाले बेटों-बेटियों का आंकड़ा अपडेट किया गया। यह एक ऐसा प्रयास था, जिससे आम लोगों का माथा ठनका और वे बढ़ती हुई बेटियों की संख्या से और प्रोत्साहित हुए। इस मॉडल को बाद में दूसरे जिलों में लागू किया गया।

जिले में ऐसे बढ़ी बेटियों की संख्या

IAS officer abhishek jain campaign for save girl child in himachal.

जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान तैयार किया गया। उसके बाद उपायुक्त की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठन किया। जिला स्तर के अलावा खंड स्तर पर इसकी कमान एसडीएम को सौंपी गई। नियमित समीक्षा बैठकें की गईं।

जिला स्तर पर अध्ययन करवाया गया, जिससे बेटियों के घटती संख्या के कारण सामने आए। आशा वर्कर को साथ लेकर जिला, ब्लॉक स्तर पर 100 से ज्यादा वर्कशॉप की गईं।

पंचायतों को अभियान से जोड़ा

उपायुक्त ने अपने स्तर पर जिले के पंचायत प्रधानों को डीओ लेटर जारी कर उनसे पूछा कि पंचायतें इस अभियान में क्या कर सकती हैं। पंचायतों ने अपने स्तर पर सुझाव दिए, जिन्हें अपनाकर लागू किया गया।

पुरस्कार और प्रोत्साहन
जिला स्तर पर उन स्कूलों को एक लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जहां लड़कियों का आंकड़ा ज्यादा था। महिला वर्कर की अधिक संख्या वाली औद्योगिक इकाइयों को भी एक लाख के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

यह है प्रदेश के बाकी जिलों की स्थिति

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वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक जिला का शिशु लिंगानुपात 875 था, जो प्रदेश भर में सबसे कम की श्रेणी में है। जिला कांगड़ा में 876, हमीरपुर में 887, सोलन में 899, बिलासपुर में 900, मंडी में 916, शिमला में 925, सिरमौर में 928, चंबा में 953, कुल्लू में 962, किन्नौर में 963, जबकि लाहौल-स्पीति में सर्वाधिक 1 हजार लड़कों के मुकाबले 1033 लड़कियां हैं।

अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों पर रखी कड़ी नजर
पीसीएंड पीएनडीटी एक्ट के तहत ऐसे अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों पर कड़ी नजर रखी गई, जो संवेदनशील हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी तय की गई। जिला प्रशासन ने ग्रामीण स्तर पर विलेज हेल्थ एंड सेनिटेशन कमेटी से संपर्क कर वालंटियर तैनात करने का फैसला लिया है।

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