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Shimla News: घर बचाने और टनल निर्माण बंद करने की मांग पर सड़कों पर उतरे सैकड़ों प्रभावित

Fri, 16 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:59 PM IST
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Hundreds of affected people took to the streets demanding to save their homes and stop tunnel construction.
ढली से संजौली चौक तक निकाली रोष रैली, शांति विहार में टनल का निर्माण न करने की उठाई मांग, एनएचएआई के खिलाफ नारेबाजी
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बोले, पुराने सर्वे के मुताबिक हो फोरलेन का कार्य

500 घरों पर खतरे की लोगों ने जताई है आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली, शांति विहार और भट्ठाकुफर के सैकड़ों भवन मालिकों और स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को फोरलेन टनल निर्माण के विरोध में रैली निकाली। रैली में शामिल लोगों ने घरों को बचाने और टनल का निर्माण बंद करने की मांग की। इस दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की।

शांति विहार के 14 घरों में दरारें आई हैं। इसके बाद फोरलेन ट्विन टनल के एलाइनमेंट की जद में आने वाले करीब 500 घरों के लोग ट्विन टनल प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले एनएचएआई और निर्माण कंपनी के खिलाफ लामबंद हुए। लोगों ने विकास चाहिए, विनाश नहीं, हमारे घरों में दरारें, हमारी सुरक्षा खतरे में और हमारी आवाज सुनो, हमारे घर बचाओ जैसे नारे लगाए। रैली में महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सहित हर आयु वर्ग के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन निर्माण करने और मौजूदा टनल निर्माण को तुरंत बंद करने की मांग उठाई।
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शाम पांच बजे ढली टनल से शुरू हुई रैली छह बजे संजौली चौक पहुंची, जहां जनसभा हुई। रैली में संघर्ष समिति के सदस्य एवं शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा, भट्ठाकुफर के पार्षद नरेंद्र ठाकुर और पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान सहित माकपा, जनवादी महिला समिति तथा भाजपा और कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता भी शामिल हुए। संजौली चौक पर आयोजित जनसभा में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने भवन मालिकों और स्थानीय लोगों को संबोधित किया।
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भट्ठाकुफर के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि पुराने सर्वे के अनुसार 12 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर करोड़ों रुपये खर्च किए थे जिसके चलते 60 से 70 लोग बेघर हुए थे। उन्होंने कहा कि पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन निर्माण में वह सरकार और एनएचएआई का साथ देने को तैयार हैं, लेकिन नए सर्वे के अनुसार टनल निर्माण किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। पुराने सर्वे में फोरलेन का निर्माण भट्ठाकुफर के पास से होना था जिसमें टनल निर्माण का जिक्र नहीं था।

अब तक टनल का 60 से 70 प्रतिशत निर्माण खाली जगह के नीचे हुआ था, लेकिन अब घनी आबादी के नीचे से निर्माण होने से घरों में दरारें आ रही हैं। शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा ने कहा कि भवनों में दरारें आने के बाद प्रभावित लोग उपायुक्त और पंचायती राज मंत्री से मिल चुके हैं। अब मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान ने कहा कि टनल निर्माण से पहले एनएचएआई ने स्थानीय लोगों को विश्वास में नहीं लिया और न ही जनसुनवाई की।



जीवनभर की कमाई बचाने की लड़ाई : चौहान
जनवादी महिला समिति की प्रदेश सचिव फालमा चौहान ने कहा कि प्रशासन भले ही काम बंद होने की बात कह रहा है, लेकिन महिलाओं को रात के समय भी निर्माण कार्य की आवाजें सुनाई देती हैं। यह जीवनभर की कमाई से बने घरों को बचाने की लड़ाई है, जिसमें सभी लोग एकजुट हैं। प्रभावित भवन मालिक अंशुल चौहान ने कहा कि शिमला के चलौंठी और भट्ठाकुफर में फोरलेन टनल निर्माण से जिन भवनों को नुकसान पहुंचा है और जिन मकानों को खाली करवाया गया है, उनके मालिकों को अब तक एनएचएआई की ओर से मुआवजा नहीं मिला है।
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