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HRTC वर्क टू रूल: 1700 रूट फेल, यात्री बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 21 Jul 2015 09:47 PM IST
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परिवहन निगम की संयुक्त समन्वय समिति की ओर से मंगलवार वर्क टू रूल के तहत सेवाएं देने का असर समूचे प्रदेश में नजर आया। सैकड़ों रूटों पर बसें नहीं चलीं। सवारियों को पैदल अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्रों और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों को हुई। बस के इंतजार में खड़े सवारियों को पैदल चलना पड़ा।
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समिति के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदेश सरकार व निगम प्रबंधन मांगे नहीं मानता है तो यह सिलसिला जारी रहेगा। पथ परिवहन निगम के 27 डिपो और 4 डिवीजन वर्कशाप पर डेढ़ बजे से दो बजे तक गेट मीटिंग हुई। इसमें एचआरटीसी यूनियन के पदाधिकारियों से सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। परिवहन निगम की संयुक्त समन्वय समिति ने चेतावनी दी कि जब तक प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन मांगे नहीं मान लेता, तब तक वर्क-टू-रूल के तहत ही सेवाएं दी जाएगी।
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लांग रूट के 400, 1300 रूट लोकल प्रभावित
प्रभावित कुल 1700 रुटों में से 1300 लोकल रूट प्रभावित हुए हैं जबकि 400 लांग रूट हैं। एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति ने पहले दिन ही चालकों और परिचालकों को मैसेज कर दिए थे कि जहां 8 आठ घंटे पूरे होंगे सवारियों को स्टेशन तक लाने के बाद बस को खड़ी कर दें।
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कर्मचारियों को लाभ क्यों नहीं?
एचआरटीसी 700 करोड़ के घाटे में चल रहा है। एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति के सचिव खमेंद्र गुप्ता ने बताया कि हर साल एचआरटीसी को 80 करोड़ का घाटा होता था। लेकिन घाटा औसतन 20 करोड़ के आसपास तक आ गया है। 60 करोड़ इनकम रेज की गई है। लेकिन फिर भी कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं की जा रही है।
ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें
- 20 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके कंडक्टरों को दो विशेष वेतन वृद्धियां
- चार, छह हजार पर काम कर रहे ड्राइवरों-कंडक्टरों को अधिसूचना के अनुसार वेतन
- पीस मील कर्मचारियों को एकमुश्त अनुबंध पर लाना
- ग्रेड पे से वंचित कर्मचारियों व अधिकारियों को ग्रेड पे देना
- कर्मचारियों के लंबित ओवरटाइम की अदायगी एकमुश्त करना
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ जल्द जारी करना
आज और रूट होंगे प्रभावित
आज हिमाचल में संयुक्त समन्वय समिति ने पहले दिन दिन वर्क-टू-रूल के तहत सेवाएं दी। समिति का कहना है कि मंगलवार को चालक और परिचालक लांग रूट पर चले गए हैं। सुबह के वक्त वह स्टेशन पर बसें खड़ी कर देंगे। ऐसे में कई बसें स्टेशनों से आगे नहीं चल पाएगी।