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वित्तीय लाभ न मिलने पर भड़क गए एचआरटीसी कर्मी, निगम को कोसा

Thu, 18 Jul 2019 12:54 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 18 Jul 2019 12:54 PM IST
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HRTC employees meeting in shimla
फाइल फोटो

प्रदेश परिवहन वर्कर यूनियन (एटक) की बैठक में समस्याओं पर चर्चा की गई। मांगें समय पर पूरा नहीं होने पर सरकार और निगम प्रबंधन को घेरा। यूनियन के राज्य महासचिव नानक शांडिल ने कहा कि परिवहन निगम के कर्मचारी दिन रात मेहनत कर रहे हैं। उन्हें समय पर वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे हैं। निगम प्रबंधन कर्मचारियों के करोड़ों रुपये की देनदारी देने में विफल रहा है।

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वर्कशाप में तकनीकी कर्मचारियों को 25 - 25 साल से एक ही पद पर कार्य करते हो गया है। पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है। वर्कशॉप में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनके स्थान पर पदों को नहीं भरा जा रहा है। यूनियन ने प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन से मांग की है कि पीस मील पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को सरकार चार और पांच साल की पॉलिसी में अनुबंध पर लाए। दलगंजन ठाकुर ने कहा कि निगम में भिन्न - भिन्न श्रेणियों के हजारों पद खाली पड़े हैं। पद न भरे जाने से काम प्रभावित हो रहा है। 
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नानक शांडिल बने यूनियन के नए अध्यक्ष
बैठक के उपरांत रोशन लाल डोगरा की अध्यक्षता में चुनाव हुए। नानक शांडिल को प्रदेशाध्यक्ष, संजय कुमार बड़वाल को राज्य महासचिव, अनिल कुमार को वरिष्ठ उप-प्रधान, संजय शर्मा, ऋषि लाल शर्मा, अशोक कुमार को उपप्रधान, दलगंजन ठाकुर को अतिरिक्त महासचिव, कामेश्वर दत्त को संगठन सचिव, मनोज कुमार को कोषाध्यक्ष, सुरेंद्र कुमार को प्रचार सचिव, संजीव जस्सल, पंकज शर्मा को सचिव, युद्ध राज मेहता को प्रेस सचिव और राज कुमार को कार्यालय सचिव नियुक्त किया गया। 
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मांगें न मानने पर एचआरटीसी कर्मचारियों में रोष
एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारियों ने समस्याओं का समाधान न किए जाने पर सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 19 जुलाई से एचआरटीसी के कर्मचारी प्रदेश भर के बस डिपो में काले बिल्ले लगाकर काम करेंगे। इसके अलावा गेट मीटिंग भी होंगी। परिवहन तकनीकी कर्मचारी संगठन ने यह फैसला तारादेवी कर्मशाला में लिया गया। 

संगठन के प्रधान टेक चंद ठाकुर ने बताया कि पिछले कई महीनों से तकनीकी कर्मचारियों की कमी चल रही है, लेकिन निगम प्रबंधन सुध नहीं ले रहा है। पीस मील कर्मचारियो को नियमित नहीं किया जा रहा है। तकनीकी कर्मचारियों के वर्तमान भर्ती और पदोन्नति नियमों में संशोधन लंबे समय से नहीं किया गया है।


जिस तरह से दुर्घटनाओं के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच करवाई जाती है, उसी तरह जनहित में यह भी जांच करवाई जानी चाहिए कि परिवहन सुविधा प्रदान करने वाल निगम की कर्मशालाओं में गाड़ियों की सुचारु और समयबद्ध मरम्मत के लिए स्टाफ उपलब्ध है या नहीं।

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