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Shimla News: लोक संस्कृति में शिव परंपरा के सूत्र खोजेगा एचपीयू
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आईसीपीआर वित्त पोषित शोध परियोजना में मेलों और परंपराओं का भी होगा दार्शनिक अध्ययन
डॉ. सुनीता देवी करेंगी परियोजना का निर्देशन
हर्षित शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, देवी-देवता परंपरा और जनजीवन में गहराई से मौजूद शिव परंपरा को अब अकादमिक शोध के जरिये नए सिरे से समझने की पहल शुरू हुई है।
भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) द्वारा वित्त पोषित शोध परियोजना शैव दर्शन एवं हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में व्यापक अध्ययन शुरू किया है। परियोजना का निर्देशन डॉ. सुनीता देवी करेंगी। शोध का मुख्य फोकस हिमाचल की लोक-आस्थाओं, मेलों, मंदिर परंपराओं, लोक कथाओं और सामाजिक जीवन में शैव दर्शन की मौजूदगी तथा प्रभाव को समझना रहेगा। परियोजना के तहत यह जानने का प्रयास होगा कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और लोक व्यवहार में शिव परंपरा किस प्रकार रची-बसी है और समय के साथ उसमें क्या बदलाव आए हैं।
अध्ययन के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड वर्क, लोक समुदायों से संवाद, गुणात्मक साक्षात्कार और सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण किया जाएगा। शोधकर्ता ग्रामीण समाज, लोक देव संस्कृति, पारंपरिक उत्सवों और धार्मिक मान्यताओं के माध्यम से शैव दर्शन के सामाजिक स्वरूप को समझने का प्रयास करेंगे। शोध कार्य के लिए रिसर्च असिस्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू की गई है। सामाजिक विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए हैं। नेट, एमफिल और पीएचडी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित शोधार्थी सर्वेक्षण, फील्ड स्टडी, डाटा विश्लेषण और रिपोर्ट लेखन से जुड़े कार्यों में भाग लेंगे।
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हिमाचल देव संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र
हिमाचल प्राचीन समय से शिव परंपरा और लोक देव संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। प्रदेश के कई मंदिर, लोकगीत, मेले और धार्मिक अनुष्ठान शैव परंपरा से प्रभावित दिखाई देते हैं। इसके बावजूद लोक संस्कृति और दर्शन को साथ जोड़कर इस विषय पर सीमित शोध हुआ है। ऐसे में यह परियोजना हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक रूप से दस्तावेजीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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डॉ. सुनीता देवी करेंगी परियोजना का निर्देशन
हर्षित शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, देवी-देवता परंपरा और जनजीवन में गहराई से मौजूद शिव परंपरा को अब अकादमिक शोध के जरिये नए सिरे से समझने की पहल शुरू हुई है।
भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) द्वारा वित्त पोषित शोध परियोजना शैव दर्शन एवं हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में व्यापक अध्ययन शुरू किया है। परियोजना का निर्देशन डॉ. सुनीता देवी करेंगी। शोध का मुख्य फोकस हिमाचल की लोक-आस्थाओं, मेलों, मंदिर परंपराओं, लोक कथाओं और सामाजिक जीवन में शैव दर्शन की मौजूदगी तथा प्रभाव को समझना रहेगा। परियोजना के तहत यह जानने का प्रयास होगा कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और लोक व्यवहार में शिव परंपरा किस प्रकार रची-बसी है और समय के साथ उसमें क्या बदलाव आए हैं।
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अध्ययन के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड वर्क, लोक समुदायों से संवाद, गुणात्मक साक्षात्कार और सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण किया जाएगा। शोधकर्ता ग्रामीण समाज, लोक देव संस्कृति, पारंपरिक उत्सवों और धार्मिक मान्यताओं के माध्यम से शैव दर्शन के सामाजिक स्वरूप को समझने का प्रयास करेंगे। शोध कार्य के लिए रिसर्च असिस्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू की गई है। सामाजिक विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए हैं। नेट, एमफिल और पीएचडी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित शोधार्थी सर्वेक्षण, फील्ड स्टडी, डाटा विश्लेषण और रिपोर्ट लेखन से जुड़े कार्यों में भाग लेंगे।
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हिमाचल देव संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र
हिमाचल प्राचीन समय से शिव परंपरा और लोक देव संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। प्रदेश के कई मंदिर, लोकगीत, मेले और धार्मिक अनुष्ठान शैव परंपरा से प्रभावित दिखाई देते हैं। इसके बावजूद लोक संस्कृति और दर्शन को साथ जोड़कर इस विषय पर सीमित शोध हुआ है। ऐसे में यह परियोजना हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक रूप से दस्तावेजीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।