#हिंदीहैंहम: अभियान से जुड़े एचपीयू के 120 शिक्षक और विद्यार्थी
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अमर उजाला के हिंदी भाषा के प्रचार- प्रसार को बढ़ावा देने और हिंदी भाषा से प्रेम करने वालों के लिए चलाए गए अभियान में अब छात्र, शिक्षक, लेखक, शोधार्थी जुड़ने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के करीब 120 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी और विभाग के विद्यार्थी इस मुहिम में सहभागी बनने लगे हैं। विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के कुशांजली हिंदी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच से जुड़ा हर छात्र इस अभियान में हिंदी के किसी, लेखक, कवि, साहित्यकार की हिंदी की रचना या अपनी रचना को बोलकर तीस सेकंड का वीडियो अपलोड कर भेज रहे हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. राजिंद्रा शर्मा और सहायक आचार्य डॉ. भवानी सिंह ने कोरोना काल में शिक्षण कार्य बंद होने पर अपने विभाग के सभी छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों को ऑनलाइन हिंदी के प्रचार, प्रसार, इसे असल में राष्ट्र की भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए अभियान का हिस्सा बनने और प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस स्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए प्रतिभागी को अपना वीडियो 9711616205 व्हाट्सएप नंबर पर अपना नाम-पता, शिक्षा आदि को संक्षेप में रिकॉर्ड कर भेजना है।
भाषा व्यावहारिक चेतना का सशक्त माध्यम : प्रो. राजिंद्रा
भाषा व्यावहारिक चेतना का सशक्त माध्यम है। इसकी नींव बचपन में ही रखी जाती है। इसमें पहली भूमिका ‘मां’ की आती है, जिस भाषा से वह संवाद करती है, उसी भाषा में बच्चे की बौद्धिक क्षमता विकसित होती है। जिस भाषा के माध्यम से हमारा पालन-पोषण हुआ, शुद्ध संस्कार मिले, शिक्षा हासिल करने का माध्यम प्राप्त हुआ, ग्रामीण और शहरी वातावरण का तर्कसंगत परिचय दिया, सांस्कृतिक धरोहर एवं इतिहास जानने का अवसर तथा विभिन्न ज्ञान की पोथियां, ग्रन्थ को पढ़ने व अध्ययन का अवसर प्रदान किया, क्या ऐसी भाषा को छोड़कार थोपी गई भाषा में हम जीवन-यापन कर सकते हैं?
यह सब भारतीयों के लिए आज भी चिंतन का विषय है। अन्य देशों की तरह हमारी भी अपनी एक प्रमुख राष्ट्र भाषा हो, जिसमें सारा हिंदुस्तान शिक्षा ग्रहण करे और जनता का शासन व प्रशासन जनता की भाषा में हो, जिससे देश का हर नागरिक लाभान्वित हो सके। आज हिंदी राष्ट्रभाषा, राजभाषा, संपर्क भाषा तथा जनभाषा के सोपान को पार करके विश्व की शीर्ष भाषा बनने की ओर अग्रसर है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला की हिंदी है हम ...मुहिम सराहनीय है, हम सबको इसमें सहभागी बनना चाहिए।
-प्रो. राजिन्द्रा शर्मा, अध्यक्ष, हिंदी विभाग एवं अधिष्ठाता भाषा संकाय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला