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HPU Shimla: पीजी की अंक तालिका में सीजीपीए के साथ प्रतिशत भी होगा अंकित, कमेटी ने दी हरी झंडी

Thu, 16 Jan 2025 12:21 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 16 Jan 2025 12:21 PM IST
सार

विश्वविद्यालय अब पीजी कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री पूरी होने के बाद दी जाने वाली सीएमसी अंक तालिका में सीजीपीए के साथ प्राप्तांक का प्रतिशत भी अंकित करेगा।

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HPU Shimla: Percentage will also be mentioned along with CGPA in the PG mark sheet, committee gave green signa
एचपीयू शिमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अब पीजी कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री पूरी होने के बाद दी जाने वाली सीएमसी अंक तालिका में सीजीपीए के साथ प्राप्तांक का प्रतिशत भी अंकित करेगा। इससे डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थियों को दूसरे विश्वविद्यालयों में प्रवेश और नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेजों में प्राप्तांक की प्रतिशतता अंकित नहीं होने से पेश आने वाली परेशानी नहीं रहेगी। इससे कंसोलिडेटिड मार्क्स शीट (सीएमसी) की उपयोगिता और बढ़ेगी। एनईपी के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के कार्यशैली में एकरूपता लाने में मदद मिलेगी। विवि में वर्तमान में पीजी डिग्री कर रहे और भविष्य में डिग्री में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।

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विवि की एकेडमिक काउंसिल की स्टेडिंग कमेटी की बुधवार को विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें इसके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सीएमसी में दस प्वाइंट यासी सौ में से प्राप्तांक की प्रतिशतता निकालने को निर्धारित किए फार्मूला का उपयोग कर लिखी जाएगी। इसके साथ क्यूमिलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज (सीजीपीए) भी अंकित होगा। काउंसिल स्टेडिंग कमेटी में लिए गए दूसरे बड़े फैसले में पीएचडी यूजीसी द्वारा बनाए रैगुलेशन-2022 के तहत अब पीएचडी में प्रवेश मिलेगा। प्रवेश के लिए विवि अलग से प्रवेश परीक्षा नहीं करेगा। प्रवेश के लिए नेट पास करना अनिवार्य रहेगा। विश्वविद्यालय के लिए यूजीसी के रैगुलेशन 2022 के आधार पर बनाए नियमों को भी कमेटी ने मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार ही अब नए सत्र में पीएचडी में प्रवेश दिया जाएगा। इसे विवि आर्डिनेंस में शामिल करने के लिए कार्यकारिणी परिषद में ले जा कर मंजूरी देना बाकी है।

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तीसरे बड़े फैसले में पीएचडी करने वाले छात्रों को अब पीएचडी कोर्स वर्क की तीन परीक्षाएं देनी होंगी। इनमें रिसर्च मेथेडोलॉजी, सब्जेक्ट स्पेशिलाइजेशन की परीक्षा के अलावा तीसरी रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स सभी को देनी अनिवार्य होगी। यूजीसी के पीएचडी के नए रैगुलेशन के तहत इस परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है। विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने बताया कि एकेडमिक काउंसिल की बैठक में तीनों प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। अब इसे विवि की कार्यकारिणी परिषद से मंजूरी दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी बाद इसे तुरंत लागू किया जाएगा। बैठक में विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल, डीन प्लांनिंग प्रो. जोगिंद्र सिंह धीमान, अधिष्ठाता छात्र कल्या प्रो. ममता मोक्टा आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. रमेश ठाकुर, प्रो. संदीप चौहान, प्रो. नयनजीत सिंह नेगी, प्रो. संजय सिंधु सहित अन्य डीन ऑफ लाइन और ऑनलाइन जुड़े थे।

यूजी में एनईपी लागू करने पर चर्चा
 यूजी डिग्री कोर्स में एनईपी-2020 लागू करने को लेकर अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम की अध्यक्षता में विवि में बैठक हुई। बैठक में यूजी डिग्री के पाठ्यक्रम और एनईपी से यूजी डिग्री कोर्स में किए जाने वाले बदलाव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में डीएस ने सभी संबंधित अधिकारियों और अधिष्ठाताओं को अब तक की तैयारियों से अवगत करवाया और विवि के स्तर पर नीति के लिए जो भी व्यवस्था की जानी है, उसे करने को कहा। एनईपी को लागू करने को लेकर हालांकि अभी सीधे तौर पर सरकार की ओर से आदेश या संकेत नहीं मिले हैं, इसके बावजूद विवि के स्तर पर एनईपी के लिए बनी कमेटी के सदस्यों के साथ ऑनलाइन मोड से समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

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