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Shimla News: वेतन दो सम्मान दो, सरकार होश में आओ के नारों से गूंजा एचपीयू
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वेतन न मिलने से खफा गैर-शिक्षक और शिक्षक संगठनों ने कुलपति कार्यालय के बाहर दिया धरना, कामकाज रखा ठप
प्रमाणपत्र, फॉर्म और फीस जमा करने संबंधी कार्य प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने पर वीरवार को भी प्रदर्शन किया। अक्तूबर माह का वेतन अभी तक जारी नहीं हुआ है। इसके विरोध में गैर-शिक्षक कर्मचारी सुबह ही कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोपहर दो बजे धरना खत्म करने के बाद कर्मचारियों ने अपनी-अपनी शाखाओं में कामकाज किया।
हिमाचल विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) ने भी सरकार और वित्त सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों संगठनों से जुड़े कर्मचारियों ने इस दौरान वेतन दो सम्मान दो, सरकार होश में आओ और शिक्षक-कर्मचारी एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। वेतन संघर्ष समिति के बैनर तले चारों गैर-शिक्षक संगठन एकजुट होकर धरना दे रहे हैं। समिति के अध्यक्ष सुरेश वर्मा, महासचिव नरेश कुमार शर्मा और समन्वयक राजेश ठाकुर ने कहा कि 5 नवंबर तक सरकार को चेतावनी दी थी लेकिन समय सीमा बीत जाने के बावजूद वेतन जारी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब तक कर्मचारियों के खाते में वेतन नहीं आता तब तक धरना जारी रहेगा। वहीं विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ हपुटवा ने भी कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के उच्च शिक्षा विभाग और वित्त सचिव पर गंभीर आरोप लगाए।
धरने के चलते विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य ठप रहा। परीक्षा, लेखा शाखा और रजिस्ट्रार कार्यालय में कामकाज बंद पड़ा है। छात्रों को प्रमाणपत्र, फॉर्म और फीस संबंधी कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि प्रदेश सरकार से अनुदान जारी करने की प्रक्रिया जारी है और जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि कर्मचारियों और शिक्षकों ने दो टूक कहा है कि जब तक वेतन खातों में नहीं पहुंचता और वित्त सचिव पर कार्रवाई नहीं होती आंदोलन जारी रहेगा। विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
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वित्त सचिव जानबूझकर रोक रहे ग्रांट : संघ
संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास, महासचिव अंकुश और डॉ. अंजलि ने कहा कि वित्त सचिव जानबूझकर विश्वविद्यालय को मिलने वाली ग्रांट रोक रहे हैं और सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को हर माह 152 करोड़ रुपये की अनुदान राशि मिलनी है लेकिन इसे टुकड़ों में और देरी से जारी किया जा रहा है। हपुटवा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और चेतावनी दी कि अगर वित्त सचिव को नहीं हटाया तो 10 नवंबर को शिक्षक राजभवन तक विरोध मार्च करेंगे।
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प्रमाणपत्र, फॉर्म और फीस जमा करने संबंधी कार्य प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने पर वीरवार को भी प्रदर्शन किया। अक्तूबर माह का वेतन अभी तक जारी नहीं हुआ है। इसके विरोध में गैर-शिक्षक कर्मचारी सुबह ही कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोपहर दो बजे धरना खत्म करने के बाद कर्मचारियों ने अपनी-अपनी शाखाओं में कामकाज किया।
हिमाचल विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) ने भी सरकार और वित्त सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों संगठनों से जुड़े कर्मचारियों ने इस दौरान वेतन दो सम्मान दो, सरकार होश में आओ और शिक्षक-कर्मचारी एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। वेतन संघर्ष समिति के बैनर तले चारों गैर-शिक्षक संगठन एकजुट होकर धरना दे रहे हैं। समिति के अध्यक्ष सुरेश वर्मा, महासचिव नरेश कुमार शर्मा और समन्वयक राजेश ठाकुर ने कहा कि 5 नवंबर तक सरकार को चेतावनी दी थी लेकिन समय सीमा बीत जाने के बावजूद वेतन जारी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब तक कर्मचारियों के खाते में वेतन नहीं आता तब तक धरना जारी रहेगा। वहीं विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ हपुटवा ने भी कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के उच्च शिक्षा विभाग और वित्त सचिव पर गंभीर आरोप लगाए।
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धरने के चलते विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य ठप रहा। परीक्षा, लेखा शाखा और रजिस्ट्रार कार्यालय में कामकाज बंद पड़ा है। छात्रों को प्रमाणपत्र, फॉर्म और फीस संबंधी कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि प्रदेश सरकार से अनुदान जारी करने की प्रक्रिया जारी है और जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि कर्मचारियों और शिक्षकों ने दो टूक कहा है कि जब तक वेतन खातों में नहीं पहुंचता और वित्त सचिव पर कार्रवाई नहीं होती आंदोलन जारी रहेगा। विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
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वित्त सचिव जानबूझकर रोक रहे ग्रांट : संघ
संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास, महासचिव अंकुश और डॉ. अंजलि ने कहा कि वित्त सचिव जानबूझकर विश्वविद्यालय को मिलने वाली ग्रांट रोक रहे हैं और सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को हर माह 152 करोड़ रुपये की अनुदान राशि मिलनी है लेकिन इसे टुकड़ों में और देरी से जारी किया जा रहा है। हपुटवा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और चेतावनी दी कि अगर वित्त सचिव को नहीं हटाया तो 10 नवंबर को शिक्षक राजभवन तक विरोध मार्च करेंगे।