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Shimla News: प्रदर्शन के बाद एचपीयू कर्मियों को मिला वेतन
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शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारी आज भी जारी रखेंगे प्रदर्शन, बोले-समस्या का स्थायी समाधान चाहिए
ग्रांट के लिए एक स्थायी नीति बनाए प्रदेश सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में सोमवार को दिनभर वेतन संकट को लेकर हुए जोरदार प्रदर्शन के बाद शाम को कर्मचारियों के खातों में अक्तूबर माह का वेतन आ गया।
बावजूद इसके शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने घोषणा की है कि आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहेगा। कर्मचारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन जारी करवाने तक सीमित नहीं है बल्कि हर माह दोहराई जाने वाली इस स्थिति से स्थायी राहत पाने के लिए है। विश्वविद्यालय के शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी सोमवार को कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे।
हपुटवा और वेतन संघर्ष समिति के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालयों को मिलने वाली ग्रांट के लिए एक स्थायी नीति बनाई जाए ताकि हर माह कर्मचारियों को वेतन के लिए सड़कों पर उतरना न पड़े। हपुटवा अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि सरकार ने दबाव में आकर वेतन तो जारी कर दिया लेकिन समस्या की जड़ अभी तक नहीं कटी है। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि नरेश शर्मा ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन के लिए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था नहीं बनाई जाती तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। मंगलवार को शिक्षकों और कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और विश्वविद्यालयों को वित्तीय संकट में धकेल रही है। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों बल्कि छात्रों की पढ़ाई को भी लगातार प्रभावित कर रही है।
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कामकाज ठप, छात्र हुए परेशान
शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने सोमवार को पूरा दिन विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों का बहिष्कार किया। कई विभाग में कक्षाएं नहीं लगीं और कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। परीक्षा शाखा, लेखा कार्यालय और रजिस्ट्रार शाखा में कार्य लटके रहे। छात्रों को प्रमाणपत्र, फॉर्म और फीस संबंधी कार्यों के लिए बार-बार लौटना पड़ा। कई विभागों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक स्थायी वित्तीय नीति नहीं बनती तब तक यह बहिष्कार जारी रहेगा।
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ग्रांट के लिए एक स्थायी नीति बनाए प्रदेश सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में सोमवार को दिनभर वेतन संकट को लेकर हुए जोरदार प्रदर्शन के बाद शाम को कर्मचारियों के खातों में अक्तूबर माह का वेतन आ गया।
बावजूद इसके शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने घोषणा की है कि आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहेगा। कर्मचारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन जारी करवाने तक सीमित नहीं है बल्कि हर माह दोहराई जाने वाली इस स्थिति से स्थायी राहत पाने के लिए है। विश्वविद्यालय के शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी सोमवार को कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे।
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हपुटवा और वेतन संघर्ष समिति के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालयों को मिलने वाली ग्रांट के लिए एक स्थायी नीति बनाई जाए ताकि हर माह कर्मचारियों को वेतन के लिए सड़कों पर उतरना न पड़े। हपुटवा अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि सरकार ने दबाव में आकर वेतन तो जारी कर दिया लेकिन समस्या की जड़ अभी तक नहीं कटी है। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि नरेश शर्मा ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन के लिए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था नहीं बनाई जाती तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। मंगलवार को शिक्षकों और कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और विश्वविद्यालयों को वित्तीय संकट में धकेल रही है। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों बल्कि छात्रों की पढ़ाई को भी लगातार प्रभावित कर रही है।
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कामकाज ठप, छात्र हुए परेशान
शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने सोमवार को पूरा दिन विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों का बहिष्कार किया। कई विभाग में कक्षाएं नहीं लगीं और कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। परीक्षा शाखा, लेखा कार्यालय और रजिस्ट्रार शाखा में कार्य लटके रहे। छात्रों को प्रमाणपत्र, फॉर्म और फीस संबंधी कार्यों के लिए बार-बार लौटना पड़ा। कई विभागों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक स्थायी वित्तीय नीति नहीं बनती तब तक यह बहिष्कार जारी रहेगा।