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HPSEB: बिजली बिल वसूली में लापरवाही करने वाले अधिकारी, कर्मी नपेंगे, प्रबंधन ने दिए सख्ती बरतने के निर्देश

Fri, 02 Dec 2022 10:37 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Dec 2022 10:37 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक पंकज डडवाल ने सभी अधीक्षण और अधिशाषी अभियंताओं को इस बाबत सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।

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HPSEB Officers and workers who are negligent in electricity bill collection will be punished, the management g
हिमाचल बिजली बोर्ड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजली बिल वसूली में लापरवाही करने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक पंकज डडवाल ने सभी अधीक्षण और अधिशाषी अभियंताओं को इस बाबत सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सरकारी विभागों से भी बिजली बिल वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा है। बिजली बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस शिमला से वर्चुअल बैठक कर प्रबंध निदेशक ने कहा कि घरेलू, कामर्शियल, औद्योगिक, जल शक्ति विभाग, स्ट्रीट लाइट कनेक्शन  से संबंधित विभाग से राजस्व प्राप्ति प्रबंधन पर जोर देना होगा।

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इस प्रक्रिया में यदि कोई अधीनस्थ दोषी पाया जाता है तो इस बारे में आगे आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रबंधन वर्ग को सूचित किया जाए। उन्होंने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं के साथ आयोजित बैठक में फील्ड में पूर्ण राजस्व प्राप्ति के लिए लगातार दौरे करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बिजली बिलों में दिए जाने वाले अनुदान और निशुल्क बिजली के एवज में अन्य सहायता राशि समय पर प्राप्त हो रही है। बोर्ड वित्तीय तौर पर और अधिक सक्षम बने इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गर्मियों में दी गई विद्युत को अब बैंकिंग प्रणाली के जरिये वापस लिया जा रहा है। प्रदेश के पास पर्याप्त मात्रा में विद्युत है और बैंकिंग प्रणाली के सिवाय किसी अन्य माध्यम से विद्युत नहीं खरीदी जा जा रही है।
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30 नवंबर को वेतन-पेंशन न मिलने पर गुस्साए बिजली बोर्ड के कर्मचारी
राज्य बिजली बोर्ड के हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों को 30 नवंबर को वेतन और पेंशन नहीं मिलने पर कर्मचारी यूनियन ने कड़ा एतराज जताया है। वीरवार सुबह इस बाबत प्रबंधन वर्ग से मिलकर कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने 125 यूनिट तक निशुल्क बिजली की नीति पर दोबारा विचार करने की मांग उठाते हुए स्मार्ट मीटरों की खरीद पर भी सवाल उठाए। उधर, राजस्व प्राप्ति के इंतजाम में जुटे बोर्ड प्रबंधन ने वीरवार दोपहर बाद वेतन जारी कर कर्मचारियों के रोष का ठंडा किया। कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने कहा कि सरकार और प्रबंधन वर्ग के गलत निर्णयों के चलते आज बिजली बोर्ड कंपनी एक बड़े वित्तीय संकट में चली गई है। समय से कर्मचारियों को वेतन और पेंशनरों को पेंशन देने में बोर्ड असमर्थ हो गया। बिजली बोर्ड को इस गंभीर संकट से बाहर निकालने के लिए आने वाली प्रदेश सरकार को कुछ कड़े फैसलों को लेने की जरूरत है।
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125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की नीति पर पुनर्विचार कर इसको मात्र जरूरतमंद उपभोक्ता तक ही सीमित करना चाहिए। राजनीतिक दृष्टि से खोले गए अनगिनत बिजली कार्यालयों को बंद कर ऐसे फिजूल खर्चो को कम करने की जरूरत है। स्मार्ट मीटर लगाने पर किए जा रहे अनावश्यक हजारों करोड़ रुपये के खर्चों पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। उधर, बोर्ड के प्रबंध निदेशक पंकज डडवाल ने बताया कि वित्तीय प्रबंधन में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। वेतन धारी कर्मचारियों और अधिकारियों को समय पर वेतन प्रदान किया जा रहा है। सेवानिवृत्ति के तय लाभ भी समय पर दिए जा रहे हैं। बोर्ड एक वाणिज्यिक संस्था है। बोर्ड का राजस्व प्राप्ति का अपना प्रबंधन है। बोर्ड के अधिक कार्य आरईसी, आरडीएसएस, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किए जाते हैं। इनमें लक्ष्यों को प्राप्त कर समय पर वित्तीय लाभ लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों के अंतर्गत दीर्घकालीन ऋण लेना एक सामान्य प्रक्रिया है। 

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