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Shimla News: एचपीएमसी की पराला यूनिट को एक लाख रुपये जुर्माना
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गिरि में दूषित पदार्थ बहाने पर कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच के बाद लगाया जुर्माना
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीपीसीबी) ने गिरि खडड में अवैध रूप से दूषित जल छोड़ने के आरोप में एचपीएमसी पराला एप्पल जूस कंसंट्रेट यूनिट को 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह कार्रवाई स्थानीय लोगों और शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड की शिकायतों के आधार पर की गई है। शिकायतों के बाद 2 और 3 अक्तूबर को क्षेत्रीय अधिकारी एचपीपीसीबी शिमला ने यूनिट का निरीक्षण किया था। इसमें कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यूनिट का अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ईटीपी) ठीक से काम नहीं कर रहा था। ईटीपी का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकले दूषित जल को शुद्ध करना होता है, लेकिन इसमें तकनीकी खामियां पाई गईं। साथ ही एक्टिवेटेड कार्बन और सैंड फिल्टर जो जल को शुद्ध करने के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, ईटीपी में पाए गए। इसके अतिरिक्त उत्पादन क्षेत्र से एक फ्लेक्सिबल पाइप सीधे नाले में गंदा पानी बहाते हुए पाया गया। यह दूषित पानी गिरि खड्ड के नजदीकी नाले में बहाया जा रहा था जिससे पानी में झाग बन रहा था और इसकी गुणवत्ता में गिरावट आ रही है।
गिरि खड्ड को पहले से ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदूषित नदियों की सूची में शामिल कर रखा है। अब दूषित पानी बहाने से खड्ड का पानी और प्रदूषित होगा। इस मामले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मानकों के तहत एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जांच टीम ने ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना को गंभीर मानते हुए यूनिट पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की जिसे अब बोर्ड द्वारा स्वीकार कर लिया है। यूनिट को यह राशि 7 दिन के भीतर हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के खाते में जमा करनी होगी। यह राशि जमा न करने की स्थिति में जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1974 के प्रावधानों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच के बाद लगाया जुर्माना
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीपीसीबी) ने गिरि खडड में अवैध रूप से दूषित जल छोड़ने के आरोप में एचपीएमसी पराला एप्पल जूस कंसंट्रेट यूनिट को 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह कार्रवाई स्थानीय लोगों और शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड की शिकायतों के आधार पर की गई है। शिकायतों के बाद 2 और 3 अक्तूबर को क्षेत्रीय अधिकारी एचपीपीसीबी शिमला ने यूनिट का निरीक्षण किया था। इसमें कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यूनिट का अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ईटीपी) ठीक से काम नहीं कर रहा था। ईटीपी का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकले दूषित जल को शुद्ध करना होता है, लेकिन इसमें तकनीकी खामियां पाई गईं। साथ ही एक्टिवेटेड कार्बन और सैंड फिल्टर जो जल को शुद्ध करने के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, ईटीपी में पाए गए। इसके अतिरिक्त उत्पादन क्षेत्र से एक फ्लेक्सिबल पाइप सीधे नाले में गंदा पानी बहाते हुए पाया गया। यह दूषित पानी गिरि खड्ड के नजदीकी नाले में बहाया जा रहा था जिससे पानी में झाग बन रहा था और इसकी गुणवत्ता में गिरावट आ रही है।
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गिरि खड्ड को पहले से ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदूषित नदियों की सूची में शामिल कर रखा है। अब दूषित पानी बहाने से खड्ड का पानी और प्रदूषित होगा। इस मामले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मानकों के तहत एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जांच टीम ने ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना को गंभीर मानते हुए यूनिट पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की जिसे अब बोर्ड द्वारा स्वीकार कर लिया है। यूनिट को यह राशि 7 दिन के भीतर हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के खाते में जमा करनी होगी। यह राशि जमा न करने की स्थिति में जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1974 के प्रावधानों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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