फॉर्चूनर के शौक में फंसी स्कूल शिक्षा बोर्ड की अफसरशाही, जानिए पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी खर्चे कम करने के प्रयासों में जुटी जयराम सरकार पर स्कूल शिक्षा बोर्ड की अफसरशाही को फॉर्चूनर की सवारी का शौक महंगा पड़ गया। बोर्ड प्रबंधन ने बीते दिनों करीब 35 लाख रुपये खर्च कर फॉर्चूनर (एसयूवी) गाड़ी खरीदी है।
इस महंगी गाड़ी को खरीदने से पहले बोर्ड ने सरकार से मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं समझा। बोर्ड के अफसरों के ठाठ यहीं पर खत्म नहीं हुए। लक्जरी गाड़ी खरीदने के बाद अफसरों ने करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर वीआईपी नंबर भी ले लिया।
फॉर्चूनर गाड़ी की खरीद करने की फाइल सचिवालय पहुंचते ही शिक्षा विभाग के अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। विभाग ने बिना मंजूरी खरीदी गई महंगी गाड़ी के मामले पर अब जांच बिठा दी है। बोर्ड प्रबंधन से इस बाबत जवाब तलब किया है।
शिक्षा बोर्ड से किया जवाब तलब
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बीते साल ही बोर्ड प्रबंधन ने इनोवा गाड़ी खरीदी थी। इनोवा गाड़ी अभी 20 हजार किलोमीटर ही चली है। इसके बावजूद बोर्ड ने करीब 30 लाख की फार्चूनर गाड़ी खरीद डाली।
जीएसटी, इंश्योरेंस और गाड़ी के वीआईपी नंबर के लिए करीब 35 लाख रुपये खर्च हुए हैं। बताया जा रहा है कि दो अप्रैल को बोर्ड ने गाड़ी की खरीद की गई जबकि सात अप्रैल को गाड़ी की पेमेंट हुई।
अभी यह गाड़ी बोर्ड के धर्मशाला स्थित दफ्तर में है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन का अतिरिक्त कार्यभार मंडलायुक्त कांगड़ा राजीव शंकर के पास है जबकि हरीश गज्जू बोर्ड के सचिव हैं।
हम तो छह लाख रुपये की गाड़ी खरीदने के लिए भी कैबिनेट से मंजूरी लेते हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बिना मंजूरी कैसे खरीदारी की। इसकी जानकारी तलब की है।- सुरेश भारद्वाज, शिक्षा मंत्री हिमाचल सरकार