हिमाचल की हर पंचायत में होगी अब महिला ग्राम सभा
हिमाचल प्रदेश में अब हर पंचायत में महिला ग्रामसभाएं होंगी। महिला ग्राम सभा की अध्यक्षता महिला पंचायत प्रधान या उपप्रधान करेंगी। महिला ग्रामसभा की साल में दो बैठकें होंगी।
इन ग्राम सभाओं में महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों पर चर्चा होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट में संशोधन करने जा रही है। मंगलवार को विस में इस बारे में संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा गया।
प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक महिला ग्राम सभा की हर वर्ष पहली बैठक आठ मार्च को होगी और दूसरी सितंबर के पहले रविवार को।
इन बैठकों की अध्यक्षता महिला प्रधान या उपप्रधान और दोनों की अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत की वरिष्ठ महिला सदस्य करेंगी। बैठक में पारित प्रस्ताव को समुचित कार्यवाही के लिए आम ग्रामसभा की बैठक में रखा जाएगा।
विधेयक में प्रावधान किया गया है कि जिस वार्ड में अनुसूचित या जनजाति के पात्र उम्मीदवार नहीं होंगे, वह वार्ड आरक्षित नहीं होगा। कोई भी ऐसा व्यक्ति सतर्कता समिति के सदस्य के रूप में चयनित नहीं होगा जो ग्राम पंचायत के पदाधिकारी का निकट संबंधी हो।
सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण
अगर कोई पदाधिकारी पंचायत या इसकी समितियों की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है या पंचायत की मंजूरी के बिना छह माह में हुईं बैठकों की आधी संख्या में उपस्थित नहीं होता तो वह पद पर नहीं रहेगा। उसका पद खाली माना जाएगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार सहकारी सभाओं की प्रबंध समितियों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था करने जा रही है। इन सभाओं में एक सीट अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होगी।
सोमवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक 2015 विधानसभा में पेश किया गया। इसमें यह प्रावधान किया गया है। सूबे में दो हजार से अधिक सहकारी समितियां हैं।
इनमें अभी तक महिलाओं और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण व्यवस्था नहीं थी। 26 फरवरी को कैबिनेट बैठक में अध्यादेश लाने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था।