सस्पेंड विधायकों पर हंगामा, 20 मिनट में पास हुए 5 विधेयक, विपक्ष का वॉकआउट
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सस्पेंड विधायकों की बहाली पर अडे़ विपक्ष ने शीत सत्र के आखिरी दिन भी वाकआउट किया। विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने प्रश्नकाल में पहली बार भाग लिया। भाजपा ने प्रश्नकाल के खत्म होते ही विधायकों के निलंबन पर फिर हंगामा किया।
उधर, सुरक्षाकर्मियों ने सदन की कार्यवाही के शुरू होने से पहले तीनों निलंबित विधायकों सुरेश भारद्वाज, राजीव बिंदल और रणधीर शर्मा को मेन गेट पर ही रोक दिया और उन्हें अंदर नहीं आने दिया। करीब 20 मिनट तक नारेबाजी करने और सरकार के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां दिखाने के बाद तीनों विधायक वहां से चले गए।
वहीं, स्पीकर बुटेल ने सदन के भीतर साफ किया कि विधानसभा परिसर भी नियमानुसार विधानसभा की परिभाषा में आता है, इसलिए विधायक भीतर नहीं आ सकते। शुक्रवार को शीत सत्र का समापन हो गया। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पांचवें और आखिरी दिन भी सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में रहा गतिरोध खत्म नहीं हो पाया।
विपक्ष ने इस शीत सत्र में पहली बार इस अंतिम बैठक में प्रश्नकाल में 11 बजे हिस्सा जरूर लिया, मगर जैसे ही सवाल-जवाब का सिलसिला 12 बजे खत्म हुआ। विपक्ष निलंबित किए गए विधायकों की बहाली करने पर अड़ा रहा। इसी बीच सदन में खूब शोर-शराबा रहा।
20 मिनट में पारित कर दिए ये पांच विधेयक
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की शीत सत्र की अंतिम बैठक में बीस मिनट में ही पांच सरकारी विधेयकों को पारित कर दिया गया। इनके पारण के समय सदन के भीतर विपक्ष मौजूद नहीं था। न कोई चर्चा, न कोई विरोध हुआ। सत्ता पक्ष के सभी विधायकों के साथ निर्दलीय विधायकों ने भी हां में हां मिलाई और ये बिल पारित हो गए। इनमें एक बिल के पारित होने और इसके अधिनियम बनने के बाद हिमाचल सरकार वैट भरने वाले राज्य के कारोबारियों की टैक्स रिटर्न, खातों, हलफनामों आदि को अब केंद्र सरकार के साथ शेयर करेगी।
इस बारे में एक विधेयक बुधवार को सदन में रखा गया था और ये शुक्रवार को पास कर दिया। ये हिमाचल प्रदेश वैट संशोधन विधेयक है। भारत सरकार के सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम ने राज्य सरकारों के साथ एमओयू के जरिये शेयरिंग मेकेनिज्म पर काम करने का प्रस्ताव दिया था। इससे टैक्स प्रणाली की प्रभावी निगरानी हो सके। पहले दिल्ली, राजस्थान और तमिलनाडु सहित कई राज्य ये काम पूरा कर चुके हैं।
हिमाचल भी कारोबारियों का संबंधित डाटा केंद्र के साथ शेयर करेगा। एक अन्य बिल हिमाचल प्रदेश ट्रांसफर ऑफ लैंड रेगुलेशन संशोधन विधेयक नाम से भी एक अन्य विधेयक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सदन में पेश किया था। इसे भी शुक्रवार को पारित किया गया। इसमें अब ट्राइबल क्षेत्रों के लोग लैंड मोर्टगेज के लिए राष्ट्रीयकृत कामर्शियल बैंकों और सहकारी बैंकों से भी लोन ले सकेंगे।
पहले नियमों में केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों या सहकारी समितियों का प्रावधान था। किसी अन्य संस्था से लोन लेने के लिए अलग से सरकार से मंजूरी लेनी होती थी। अब ऐसा करने की जरूरत नहीं होगी। एक अन्य विधेयक नगर निगम संशोधन अधिनियम, जिसके तहत शिमला नगर निगम में वार्डों की संख्या को 25 से बढ़ाकर 37 किया गया। चौथा विधेयक एंट्री टैक्स से संबंधित है, जिसके तहत राज्य के भीतर डीजल और लूब्रिकेंट्स खरीदने पर टैक्स में राहत दी गई थी। इस बारे में पूर्व में अध्यादेश जारी किया गया था। एक अन्य हिमाचल प्रदेश विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक भी पारित किया गया।
निलंबन पर भड़के धूमल, बुटेल ने दिया ये जवाब
एक ओर नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल और अन्य भाजपा विधायक इस बात पर अडे़ थे कि भाजपा के तीनों विधायकों का ये निलंबन नियमानुसार की गई कार्रवाई नहीं है और विधायकों को सदन परिसर से दूसरे दिन भी अंदर आने नहीं देना तानाशाही है, वहीं स्पीकर ने सदन में दो टूक कहा कि विधायकों का निलंबन उचित है। ये सदन की अवमानना का मामला था।
बुटेल बोले कि जहां तक भाजपा के तीनों विधायकों को गेट पर रोकने की बात है तो वे विधानसभा के नियमों के मुताबिक ही सदन के भीतर नहीं आ सकते हैं। नियमों में साफ लिखा गया है कि विधानसभा परिसर को ही विधानसभा माना जाता है और ये परिसर मेन गेट से शुरू हो जाता है। दूसरी ओर से स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर और संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी सदन के भीतर नियमों का हवाला देते हुए कहा कि निलंबित विधायक परिसर से भीतर ही नहीं आ सकते हैं।
बीच में नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने संसद के एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि परिसर में चुने हुए सदस्यों को न आने देना नियमों के खिलाफ है। स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल भी जोर देकर इस बात को दोहराते रहे कि इस सदन में नियमों को सदस्यों ने ही बनाया है। इस विधानसभा के नियमों के अनुसार ही यहां कार्यवाही हो सकती है।
बाद में नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल और अन्य भाजपा विधायकों ने शीत सत्र के लिए निलंबित विधायकों के सम्मान की बात करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। सदन की बैठक करीब एक बजे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
स्पीकर ने विपक्ष की नहीं सुनी तो क्यों बैठे रहते : धूमल
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि सदन में जब विस अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने विपक्ष की कोई बात ही नहीं मानी तो क्यों बैठे रहते। इसलिए वाकआउट किया। विपक्ष लोकहित के मामलों को सदन तथा बाहर उठाता रहेगा। सदन में अगर विपक्ष की नहीं सुनी जाएगी तो वे अपनी बात जनता की अदालत में रखेंगे।
उन्हें सत्र के आखिरी दिन समस्याओं के समाधान की उम्मीद थी, लेकिन विपक्ष का पक्ष नहीं सुना गया। भाजपा के निलंबित विधायकों को शुक्रवार को भी विधानसभा के गेट पर रोक लिया गया। निलंबित विधायक विपक्ष लॉज में तो बैठ सकते थे। विधानसभा में लगातार नियम बदले जा रहे हैं।
कहा कि नियम-62 के तहत सदन में विपक्ष के ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा नहीं करवाई गई। तत्कालीन घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करने को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया जाता है। विधायक जयराम ठाकुर बंजार में पकड़े गए आईएस के संदिग्ध आतंकी के मुद्दे पर चर्चा चाहते थे, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। विचित्र बात यह हुई कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा की बजाय लिखित कॉपी थमा दी गई। कहा कि आईएस का संदिग्ध आतंकी पकड़ा जाना गंभीर घटना है।
रेस्टहाउस की बुकिंग के सवाल पर भड़के भरमौरी
वन विभाग के विश्राम गृह की बुकिंग के सवाल पर शुक्रवार को सदन में वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी भड़क गए। मंत्री की भाजपा विधायकों से तीखी नोक-झोंक भी हुई। कहा कि वह हमीरपुर विश्रामगृह में रुके थे तो पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी रात को वहां आए। उन्हें पूरा वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। हालांकि, विश्राम गृह की बुकिंग के लिए वन अधिकारियों को पावर दी गई है।
फिर भी किसी को कोई परेशानी होती है तो वह सीधे मुझे भी फोन कर सकते हैं। मंत्री और विधायकों के बीच बहस में मुख्यमंत्री को भी खड़ा होना पड़ा। रविंद्र रवि ने वन विभाग के विश्राम गृह चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के नाम पर ही बुक रहने के आरोप लगाए। चंडीगढ़ और दिल्ली के हिमाचल सदन में भी भाजपा विधायकों के नाम पर बुकिंग न करने के आरोप भी लगाए।
कहा कि सर्दियों के मौसम में भी शिमला और पालमपुर में जंगल भड़क रहे हैं और वन मंत्री दिल्ली पहुंच गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री बोले - पिछले कई महीनों से बरसात नहीं हुई है। इसलिए जंगलों में आग लग रही है। वन मंत्री ने कहा कि विश्राम गृहों की बुकिंग फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व के आधार पर होती है, लेकिन वीआईपी के आने पर कमरा खाली करना पड़ता है। बताया कि प्रदेश में वन विभाग के तहत 281 विश्राम गृह और 178 निरीक्षण हट बनाए गए हैं।
पुरानी योजनाओं के दोबारा शिलान्यास कर रही सरकार
सरकार पर पुरानी योजनाओं के दोबारा शिलान्यास और लोकार्पण करने के आरोप लगाकर भाजपा विधायकों ने खूब तल्खी दिखाई। आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री की गैर मौजूदगी में उनके नाम के पत्थर विकास योजनाओं पर लगाए जा रहे हैं। भाजपा कार्यकाल में शुरू की योजनाओं के दोबारा शिलान्यास और भूमि पूजन कर कांग्रेस नेता अपने नाम के पत्थर चिपका रहे हैं।
सराज के विधायक जयराम ने पूछा कि योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण के तय नियम क्या हैं। सीएम की गैर मौजूदगी में उनके नाम पर पत्थर लगाने के ऐसे कोई आदेश सीएम कार्यालय से जारी हुए हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण उनकी अनुमति से हो रहे हैं। सरकार ने किसी भी पुरानी योजना पर नया शिलान्यास पत्थर नहीं लगाया है।
विधायक जयराम ने कहा कि रावमापा बाली चौकी स्कूल का पूर्व भाजपा सरकार के समय शिलान्यास हुआ था। हाल ही में कांग्रेस नेता फिर उसका शिलान्यास करने पहुंचे। इसका एसएमसी और स्थानीय लोगों ने विरोध किया। शिलान्यास पट्टिका तोड़ने पर पुलिस में एफआईआर भी दर्ज हुई है। दो पीएचसी का भी पहले ही उद्घाटन हो चुका था।
उसका भी कांग्रेस नेता ने फिर भर उद्घाटन किया। सरकाघाट के विधायक इंद्र सिंह ने भी डिग्री कॉलेज का भूमि पूजन दो बार करने की बात कही। विधायक अनिरुद्ध के सवाल पर सीएम ने परिवहन मंत्री जीएस बाली से कसुम्पटी के लिए बन चुकी सड़क पर बस चलाने को कहा।
हर जिले में तैनात होंगे लेबर वेलफेयर ऑफिसर
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड हर जिले में लेबर वेलफेयर ऑफिसर की तैनाती करेगा। इसके लिए योजना बना ली है। अगली कैबिनेट में मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह और देहरा के विधायक रविंद्र रवि के सवाल के जवाब में बताया कि लेबर अधिकारी से काम का बोझ कम करने को लेबर वेलफेयर ऑफिसर तैनात किए जाएंगे।
महेंद्र सिंह ने कामगार बोर्ड के माध्यम से मजदूरों को दी जाने वाली साइकिल, इंडक्शन, वॉशिंग मशीन, सोलर लाइट्स सहित अन्य वस्तुओं की खरीद-फरोख्त में धांधली और इसके घटिया होने के आरोप लगाए। कहा कि इनकी कीमतें भी अलग-अलग हैं। कुछ मजदूरों को कम तो कुछ को महंगी वस्तुएं मिल रही हैं। आरोप लगाया कि सीटू के माध्यम से मजदूरों को फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। इसकी जांच की जानी चाहिए।
इस पर मंत्री मुकेश अग्निहोत्री बोले - बोर्ड रेट कांट्रेक्ट के अनुसार वस्तुओं की खरीद-फरोख्त कर रहा है। धांधली की कोई गुंजाइश नहीं है। सीटू से जारी प्रमाण पत्रों के संबंध में कोई शिकायत मिलती है तो सरकार इसकी जांच करेगी। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पास 335.39 करोड़ उपकर के माध्यम से इकट्ठा हुए हैं। वर्तमान में कुल 5917 कामगार पंजीकृत हैं। इसमें मनरेगा के तहत 3659 और 2258 अन्य कामगार पंजीकृत हैं।