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नियामक आयोग अध्यक्ष का एक और मनमाना फैसला, सदस्य ने खोला मोर्चा
Wed, 20 Nov 2019 12:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 20 Nov 2019 12:30 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
सरकारी जांच से घिरे राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के अध्यक्ष केके कटोच के एक और मनमाने फैसले के खिलाफ सदस्य एसपी कत्याल ने मोर्चा खोल दिया है। सदस्य ने बिना बैठक किए अध्यक्ष पर निजी संस्थानों के निरीक्षण को छह जिले अपने पास रखने और छह जिले उन्हें सौंपने के आदेशों का विरोध किया है।
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सदस्य कत्याल ने कहा है कि अध्यक्ष प्रदेश सरकार को ठेंगा दिखाकर गैर कानूनी तरीके से फैसले ले रहे हैं। आयोग की बैठक किए बिना ही मनमाने तरीके से फैसले ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिलों के बंटवारे को लेकर सभी निजी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी करना भी कई प्रश्न खड़े कर रहा है।
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बीते कुछ समय से राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग विवादों में चल रहा है। अध्यक्ष केके कटोच की कार्यप्रणाली को देखते हुए सरकार ने कुछ माह पूर्व उनकी शक्तियां छीन ली थीं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा को तदर्थ अनुशासनात्मक अथॉरिटी नियुक्त किया गया।
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निदेशक ने सरकार से शक्तियां मिलने के बाद अध्यक्ष केके कटोच के फैसले को पलटते हुए बर्खास्त और डिमोट किए गए पांच कर्मचारियों की सजा माफ कर दी थी। सरकार ने अध्यक्ष के खिलाफ जांच भी बैठाई है।
इसके बावजूद अध्यक्ष ने बीते दिनों आयोग के सचिव और वित्त अधिकारी की शक्तियां छीन कर आगामी आदेशों तक अपने पास रख ली हैं। अब जिलों का बंटवारा कर अध्यक्ष ने एक और विवाद खड़ा कर दिया है।