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Shimla: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोर्ट को साैंपी रिपोर्ट, ठोस कचरा निस्तारण मामले में नहीं कोई एक्शन प्लान

Tue, 22 Oct 2024 09:54 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 22 Oct 2024 09:54 AM IST
सार

अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय को अपने पिछले आदेश में ठोस कचरे के निस्तारण के लिए क्या कदम व योजनाएं बनाई हैं, इस पर रिपोर्ट पेश करने को कहा था। 

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hp Pollution Control Board submitted report to the court, said there is no action plan in solid waste disposal
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ठोस कचरे के निस्तारण मामले में अदालत के आदेशों की अनुपालना करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बोर्ड ने बताया कि करीब 13 संस्थाएं इस पर काम कर रही हैं। अगर कोई व्यक्ति या संगठन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका चालान काटने का काम सबसे बड़ी संस्था करती है। अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय को अपने पिछले आदेश में ठोस कचरे के निस्तारण के लिए क्या कदम व योजनाएं बनाई हैं, इस पर रिपोर्ट पेश करने को कहा था। 

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मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने की। अदालत में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अनिल जोशी व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए। अदालत ने सचिव से पूछा कि ठियोग, नारकंडा व अन्य स्थानों पर शौचालय बहुत ही गंदी हालत में हैं। जगह-जगह प्लास्टिक व कूड़े के ढेर लगे हैं। इसके निवारण के लिए विभाग क्या कर रहा है। इस पर बोर्ड की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया कि स्थानीय निकायों के लिए कोई भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक्शन प्लान नहीं बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई पर अपनी रिपोर्ट जमा करवाने को कहा है। मामले को अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी। 

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पंचायत सचिवों के पास नहीं चालान बुक
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सुलेमन मामले में न्याय मित्र देवन खन्ना ने ठोस कचरा निस्तारण में धरातल पर उड़ रहीं धज्जियों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।  कहा कि पंचायतों में ठोस कचरे के निस्तारण के लिए पंचायत सचिवों के पास कोई चालान बुक नहीं है, जिसके आधार पर कूड़ा-कचरा डालने पर पंचायत सचिव जुर्माना लगा सकें। पंचायती राज अधिनियम 1995 में पंचायत सचिव के पास जुर्माना लगाने का अधिकार है। अधिवक्ता ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पंचायतों में कहीं भी उचित कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने के कोई नियम नहीं बनाए गए हैं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हलफनामे में कहा कि शिमला समेत कुछ शहरी निकायों को छोड़कर बाकी निकायों के पास कोई एक्शन प्लान नहीं है। खन्ना ने अदालत में अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिए हैं कि गांव के प्रत्येक घर से कचरा एकत्रित करने के लिए एक रणनीति बनाए जाए। खुले में कचरा फेंकना व जलाने पर प्रतिबंध लगाए जाए। उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान किया जाए। हिमाचल प्रदेश गैर बायोडिग्रेडेबल कचरा नियंत्रण अधिनियम 1995 के तहत पंचायत सचिव के पास चालान जारी करने का अधिकार है। सभी होम स्टे और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में अनुचित कचरा निपटान पर जुर्माने की जानकारी को पोस्टर लगाए जाएं। 

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