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हाईकोर्ट के पुलिस को आदेश, फर्जी शिक्षण संस्थानों का पता कर सील करो

Fri, 08 Jul 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 08 Jul 2016 12:02 AM IST
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HP High Court orders to seal forge educational institute.
हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना संबद्धता और मान्यता के चल रहे ट्रेनिंग और शिक्षण संस्थानों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सभी पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फर्जी और जाली ट्रेनिंग-शिक्षण संस्थानों का पता लगाकर उनके खिलाफ  आपराधिक केस दर्ज करे।

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न्यायाधीश राजीव शर्मा ने धर्मशाला के एक फर्जी शिक्षण संस्थान के मैनेजर की अंतरिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह आदेश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का दायित्व है कि प्रदेश में कोई भी फर्जी शिक्षण संस्थान न खुले।
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यह संस्थान बड़े-बड़े विज्ञापन देकर मोटी रकम छात्रों और उनके अभिभावकों से ऐंठते हैं। कोर्ट ने सभी पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए कि वह फर्जी शिक्षण संस्थानों का पता लगा कर उन्हें सील करे और उनके बैंक अकाउंट जब्त कर प्रभावित छात्रों को उनका पैसा लौटना सुनिश्चित बनाएं।

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कोर्ट ने लगाई फटकार, जांच अधिकारी बदलने के आदेश

HP High Court orders to seal forge educational institute.

कोर्ट ने धर्मशाला में इंटरेक्टिव फैशन डिजाइनिंग के नाम से चल रहे संस्थान के मैनेजर रवि कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रहे अधिकारी को भी तुरंत बदल कर मामले की जांच सीआईए को सौंपने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने जांच अधिकारी को फटकार लगाई कि 5 दिसंबर 2015 को दर्ज प्राथमिकी के बावजूद अभी तक जरूरी जानकारी भी नहीं जुटाई गई है। कोर्ट ने कहा कि जितनी देरी जांच में होती है उतने ही सबूत मिटते जाते हैं। कोर्ट ने संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश राणा के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

यह है पूरा मामला

HP High Court orders to seal forge educational institute.

धर्मशाला स्थित इंटरेक्टिव फैशन डिजाइनिंग के मैनेजर रवि कुमार के खिलाफ  धारा 420 के तहत 5 दिसंबर 2015 को धर्मशाला पुलिस स्टेशन के समक्ष आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

जांच के दौरान पाया गया कि संस्थान न तो कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड है न ही एक्सेलसियर इंटरेक्टिव सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड से। जांच में यह भी पाया गया कि 69 छात्रों ने संस्थान में दाखिला लिया था।

आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि इन्होंने दाखिले के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जबकि उनका संस्थान कानूनी तौर पर एफिलिएटेड नहीं है।

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