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प्रथम श्रेणी अफसरों के तबादले के लिए भी तय हो समयसीमा: हाईकोर्ट

Sun, 28 Oct 2018 12:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 28 Oct 2018 12:11 PM IST
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hp high court ordered to Determine deadline for the transfer of first class officers

हिमाचल उच्च न्यायालय ने तबादले से जुड़े एक मामले में सरकार को निर्देश दिया कि प्रथम श्रेणी अधिकारियों के लिए भी चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की तर्ज पर कार्यकाल का निर्धारण किया जाए।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रधानाचार्य रतन चंद की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। चतुर्थ श्रेणी कर्मी के लिए एक स्थान पर तीन साल का कार्यकाल निर्धारित है। 
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प्रार्थी प्रधानाचार्य को सितंबर 2017 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला आलमपुर स्थानांतरित किया। कुछ माह बाद 24 मई, 2018 को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला आनी स्थानांतरित कर दिया।
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प्रार्थी ने स्थानांतरण के खिलाफ  प्रदेश प्राधिकरण के समक्ष याचिका दाखिल की। प्राधिकरण ने प्रार्थी को शिक्षा सचिव के समक्ष प्रतिवेदन के माध्यम से स्थानांतरण आदेश रद्द करने या किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित

करने की गुहार लगाने के आदेश जारी किए, लेेकिन शिक्षा सचिव ने प्रतिवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि प्रथम श्रेणी के अधिकारी के लिए स्थानांतरण नीति लागू नहीं होती। उसे कभी भी कहीं भी स्थानांतरित किया जा सकता है।

प्रार्थी स्कूल प्रिंसिपल को कांगड़ा में स्थानांतरण के दिए आदेश

hp high court ordered to Determine deadline for the transfer of first class officers

 न्यायालय ने कहा कि 19 जुलाई, 2018 को सचिव शिक्षा ने कानून के मुताबिक सही और स्पष्ट आदेश पारित नहीं किया। हर कर्मी चाहे वह चतुर्थ श्रेणी हो या प्रथम श्रेणी में, उसके लिए 3 साल का कार्यकाल निर्धारित हो, विशेषतया जब उसके स्थानांतरण के पीछे कोई प्रशासनिक या लोकहित शामिल न हो।

न्यायालय ने पाया कि शिक्षा सचिव ने स्थानांतरण के लिए ऐसा कोई कारण नहीं दिया है। न्यायालय ने प्रिंसिपल के स्थानांतरण आदेश रद्द करते हुए शिक्षा सचिव को आदेश दिए कि वह प्रार्थी के मामले को दोबारा से देखें और उसे किसी खाली स्टेशन पर कांगड़ा जिले में या उसके घर के नजदीक स्थानांतरित करें।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसे जहां स्थानांतरित किया जा रहा है, वहां यह देखा जाए कि उस प्रधानाचार्य का उस जगह कार्यकाल पूरा हुआ है या नहीं। अगर कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है तो वहां स्थानांतरित न किया जाए। न्यायालय ने आदेश पर अमल के लिए 2 सप्ताह का समय दिया।

शिक्षकों के रिक्त पद भरने का हाईकोर्ट ने मांगा टाइम शेड्यूल

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प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी से जुड़े जनहित मामले में शिक्षा सचिव को आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोर्ट के समक्ष एक टाइम शेड्यूल दें जिसके अंदर नियमित शिक्षकों की भर्ती कर ली जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किए।

कोर्ट ने सरकार को यह भी स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि कितने समय के भीतर स्कूलों में स्टॉप गैप अरेंजमेंट के तहत शिक्षकों की कमियों को पूर्ण करने के लिए भर्ती की जाएगी। कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में सरकार से पूछा था कि शिक्षा विभाग में रिक्त पड़े सभी प्रकार के पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी थी कि स्कूलों में हर विषय के अनुसार रिक्त पदों की संख्या कुल कितनी है।

जिले के अनुसार स्कूलों की संख्या कुल कितनी है। कितने पदों को भरने के लिए हिमाचल प्रदेश स्टाफ  सिलेक्शन कमीशन को रिकविजिशन भेजी गई है। कोर्ट ने हरीश पांडे व अन्यों द्वारा दायर उस याचिका का निपटारा इस आदेशों के तहत किया जिसके तहत प्रार्थियों ने प्रदेश सरकार को शिक्षकों की भर्ती नियमित तौर पर करने की कोर्ट से गुहार लगाई थी।

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