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कोटी वन कटानः हाईकोर्ट ने आरोपी को दिए 34 लाख जमा करने के आदेश

Tue, 22 May 2018 11:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 22 May 2018 11:07 AM IST
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hp high court ordered accused to deposit 34 lakhs in koti illicit felling case

प्रदेश हाईकोर्ट ने कोटी अवैध कटान मामले के आरोपी पर शिकंजा कस दिया है। प्रदेश हाईकोर्ट ने सब तहसील जुन्गा में वन विभाग की कोटी रेंज में 416 पेड़ों के कटान मामले में भूप सिंह पर शिकंजा कसते हुए उसे दो सप्ताह के भीतर 34 लाख 68 हजार 233 रुपये जमा करने के आदेश दिए।

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यह रकम उन पेड़ों की कीमत के रूप में आंकी गई है, जिन्हें कथित तौर पर भूप सिंह ने अवैध खनन के लिए काटा। भूप सिंह को यह राशि हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा करवानी होगी।
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कोर्ट ने सरकार को यह छूट भी दी है कि वह भूप सिंह को मिली जमानत को रद्द करने के लिए सक्षम कोर्ट के समक्ष आवेदन कर सकती है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए भी दिए हैं कि वह इस अवैध कटान के संदर्भ में संबंधित दोषी वन और अन्य कर्मियों के खिलाफ  एफआईआर दर्ज करे। 
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12 जनवरी 2018 को कोटी रेंज में बड़े पैमाने पर वन कटान का मामला सामने आया था। यह मामला तब उजागर हुआ जब उक्त बीट का फ ॉरेस्ट गार्ड रिटायर हुआ और नए गार्ड पवन ने बीट संभाली।

जंगल में पाए गए थे सैकड़ों पेड़ों के कटे ठूंठ

hp high court ordered accused to deposit 34 lakhs in koti illicit felling case

गार्ड की शिकायत के बाद वन विभाग की टीम ने शलोट गांव के साथ लगते जंगल में सैकड़ों पेड़ों के कटे ठूंठ पाए। इनमें देवदार , बान के अलावा चीड़ के पेड़ भी शामिल थे। इनकी मार्केट वेल्यू करीब 20 से 30 लाख के करीब बताई गई थी। 

अवैध पेड़ कटान का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने भूप सिंह के खिलाफ  पुलिस थाना ढली में एफ आईआर भी दर्ज करवाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि इतने बड़े पैमाने पर वन कटान के लिए केवल

सेवानिवृत्त फ ॉरेस्ट गार्ड हरी सिंह, डिप्टी रेंजर विक्की चौहान और प्रकाश चंद को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसमें अन्य वन कर्मी भी संलिप्त होंगे। इन तीन वन कर्मियों के खिलाफ  विभागीय कार्यवाई अमल में लाई गई है।

इस मामले में रेंज ऑफि सर अनु ठाकुर की शिकायत पर पुलिस ने जुन्गा के शलोट गांव के भूप राम के खिलाफ  फ ॉरेस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया था कि जंगल में पेड़ों का कटान पिछले 4 साल से गुपचुप तरीके से हो रहा था।

कोर्ट ने प्रधान सचिव वन को यह बताने के आदेश भी दिए कि इस मामले में संलिप्त दोषी वन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ  क्या कार्रवाई अमल में लाई गई है।  मामले पर सुनवाई 31 मई को होगी।

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