अवैध कब्जों पर सरकार को फटकार, हाईकोर्ट ने दिए ये आदेश
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हिमाचल में वन भूमि से पेड़ काटकर अवैध ढंग से सेब के बगीचे विकसित करने के मामले में सुनवाई कर रहे प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि 28 फरवरी 2017 तक वन भूमि से सभी अवैध कब्जों को हटाए।
बुधवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान मुख्य अरण्यपाल को कोर्ट के उपरोक्त आदेशों की अनुपालना बताने के लिए 28 फरवरी को खुद कोर्ट में हाजिर रहने के आदेश दिए हैं।
बता दें कि कृष्ण चंद सारटा ने वर्ष 2014 में मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र लिखकर बताया था कि लोगों ने जंगलों को काटकर घर, खेत और बगीचे बना लिए हैं। वन विभाग की मिलीभगत से इन्हें बिजली और पानी के कनेक्शन भी मुहैया करवा दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार को दिए सख्त आदेश
हाईकोर्ट ने पत्र पर संज्ञान लिया और वन विभाग को समय समय पर अवैध बगीचों को काटकर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने के आदेश दिए। वन विभाग ने कोर्ट के आदेशानुसार वन भूमि से सेब के पेड़ों को काटने का अभियान छेड़ा लेकिन कुछ कब्जाधारियों ने विभिन्न अदालतों में मामले दायर कर इस मुहिम को लटकाने की कोशिश की।
इस पर हाईकोर्ट ने ऐसे मामले देख रहे न्यायालयों को तय समय सीमा के भीतर वन भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों को निपटाने के आदेश दिए। कई बार कोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिए कि वह तय सीमा के भीतर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाए। वन विभाग की सुस्त रफ्तार को देखते कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को 2 माह के भीतर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने के आदेश दिए।
पिछली सुनवाई में पीसीसीएफ ने किया था ये दावा
पिछली सुनवाई के दौरान पीसीसीएफ ने कोर्ट को बताया था कि कुल्लू जिला के 1030 और शिमला जिला के 1929 अवैध कब्जों के मामलों में वन भूमि को 4 सप्ताह के भीतर खाली करवा लिया जाएगा।
रोहडू़ के डीएफओ की ओर से बताया गया कि रोहड़ू में 10 बीघा से कम वन भूमि पर कब्जा करने वाले 1481 मामलों में बेदखली आदेश पारित किए जा चुके हैं और 10 बीघा से अधिक 418 मामलों में से 399 का निपटारा कर लिया गया है।
कोर्ट ने डीएफ ओ रोहड़ू को आदेश दिए थे कि वह 4 सप्ताह के भीतर लंबित मामलों का निपटारा करें। साथ ही पीसीसीएफ को भी आदेश दिए थे कि वह रोहड़ू के निपटाए गए मामलों में 4 सप्ताह के भीतर वन भूमि को अवैध कब्जा मुक्त कराएं।