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वन भूमि पर अवैध कब्जे, कोर्ट ने अफसरों से मांगा जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 17 May 2016 12:00 AM IST
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में संज्ञान लेते हुए सभी मंडलायुक्तों और जिलाधीशों को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने गद्दी यूनियन के प्रधान कालीदास की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किए।
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प्रार्थी के अनुसार वे मंडी जिला के पिछड़ा एवं जनजातीय क्षेत्र बरोट से संबंध रखते हैं। वे भेड़-बकरियां पालते हैं और गद्दी समुदाय से जाने जाते हैं। जोगिंद्रनगर क्षेत्र के डोल, तुलाह वन क्षेत्र के तहत बगडैना, ठारा, रास, मलोग, कनोग और छांब गांवों के जंगलों में अपनी भेड़-बकरियां चराने ले जाते हैं। सर्दियों के मौसम में वे इन्हीं जंगलों में डेरा जमाते हैं। प्रार्थी ने शिकायत की है कि स्थानीय लोगों ने इन वनों पर अपने कब्जे कर लिए हैं।
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हजारों के हिसाब से खैर प्रजाति के पेड़ काट दिए हैं। वन विभाग के अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्हें इन क्षेत्रों में भेड़-बकरियां चरना मुश्किल हो गया है। अवैध कब्जाधारी उनके साथ गाली गलौच करने के अलावा मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। भेड़-बकरियां उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। हाईकोर्ट ने इन तथ्यों के दृष्टिगत मामले पर संज्ञान लेते हुए इसे जनहित से जोड़ा। मामले पर आगामी सुनवाई 30 मई को होगी।
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