कंडक्टर भर्ती में गड़बड़ी का पता था तो रिजल्ट का इंतजार क्यों किया: कोर्ट
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को एचआरटीसी में 500 कंडक्टरों की भर्ती के लिए ली गई लिखित परीक्षा में कथित घोटाले को लेकर दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई हुई।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने याचिका की मेंटेनएबिलिटी पर सवाल उठाते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने से फिलहाल इनकार कर दिया।
कोर्ट ने प्रार्थियों से सवाल किया कि जब 12 जून को उन्हें लिखित परीक्षा में गड़बड़ी का पता चला तो वे उस परीक्षा के परिणाम का इंतजार क्यों करते रहे। जब वे सफल नहीं हुए तो परीक्षा प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाने लगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से यह बताने के लिए कहा है कि याचिका किस तरह मेंटनएबल है।
मंत्री के नजदीकियों को लाभ देने का आरोप
मामले के अनुसार प्रार्थी नरेंद्र कुमार सहित 19 याचिकाकर्ताओं ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि परिवहन मंत्री जीएस बाली के नजदीकियों को लाभ देने के लिए इस भर्ती में अयोग्य उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में सफल घोषित कर साक्षात्कार लिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एचआरटीसी द्वारा इस वर्ष विज्ञापित 500 अस्थायी कंडक्टरों की भर्ती परीक्षा में बड़ा घोटाला हुआ है।
परीक्षा में मोबाइल फोन का इस्तेमाल
प्रार्थियों के अनुसार इन पदों की भर्ती के लिए 12 जून को ली गई लिखित परीक्षा में एक नई बात देखने को मिली। प्रार्थियों की ओर से कोर्ट को एक फोटो दिखाने की कोशिश की गई, जिसमें परीक्षा केंद्र में कथित रूप से मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए परीक्षार्थी दर्शाए गए हैं। प्रार्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा केंद्रों में प्रश्न पुस्तिकाओं के न बंडल सील्ड थे और न ही प्रत्येक प्रश्न पत्र सील्ड था।
1630 अभ्यर्थियों के 1 जुलाई से इंटरव्यू शुरू
इस परीक्षा में करीब 30,000 अभ्यर्थियों ने भाग लिया जिनमें से 1630 अभ्यर्थियों को 1 जुलाई से शुरू हुए साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है।
प्रार्थियों ने परिवहन विभाग के प्रधान सचिव सहित एचआरटीसी के चीफ जनरल मैनेजर, शिमला, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा के डिविजनल मैनेजरों को प्रतिवादी बनाया है। मामले को याचिकाकर्ताओं की इस तरह की याचिका दायर करने की योग्यता साबित करने के लिए 26 जुलाई को सुनवाई होगी।