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ढाई हजार न्यायिक कर्मचारियों को बड़ी राहत

Wed, 03 Sep 2014 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 03 Sep 2014 12:23 AM IST
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HP govt withdraw the case against judicial officers.

हिमाचल प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में लंबित न्यायिक कर्मचारियों की वेतन वृद्धि से संबंधित अपील को वापस ले लिया है, जिससे प्रदेश भर के हजारों कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद बंधी है। हिमाचल प्रदेश न्यायिक कर्मचारी संघ के प्रदेश संगठन मंत्री और जिला महासचिव भगवान दास ने सरकार की अपील वापस लेने के फैसले का स्वागत किया है।

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उन्होंने बताया कि यह अपील उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति जेएस खेहाड की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष विचाराधीन थी। इसमें प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के अराजपत्रित न्यायिक कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी देने के फैसले को चुनौती दी थी। उच्चतम न्यायालय की बेंच ने इस मामले में स्पष्ट किया कि शेट्टी कमीशन की वर्ष 2003 के प्रस्तावों के तहत अन्य सभी राज्यों में वेतन वृद्धि को लागू कर दिया गया है।
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ऐसे में किसी आधार पर वेतन वृद्धि अदा न करने से छूट नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा है कि ज्यादा से ज्यादा प्रदेश सरकार को बकाया भुगतान किस्तों में अदा करने की अनुमति दी जा सकती है। प्रदेश सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में राज्य की वित्तीय हालत ठीक नहीं होने की दलील दी गई थी।
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सरकार की ओर से कहा गया था कि न्यायिक कर्मचारियों को वेतन वृद्धि देने से सालाना एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पडे़गा। उच्चतम न्यायालय की बेंच ने माना कि अगर हिमाचल प्रदेश को छूट दी जाती है तो कमीशन के इन प्रस्तावों को लागू करने में दूसरे राज्य भी अपनी वित्तीय कठिनाइयों को लेकर यह छूट मांग सकते हैं।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नहीं माना जा सकता कि राज्य की वित्तीय हालत इतनी खराब है कि वह सालाना एक करोड़ का अतिरिक्त बोझ नहीं वहन कर सकती। प्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन जनवरी 2014 को एचपी सबार्डिनेट कोर्ट्स इंप्लोई (पे, अलाउंसेस एंड अदर कंडिशनस ऑफ सर्विस) एक्ट 2005 की धारा 3 को निरस्त कर दिया था।


क्योंकि यह उच्चतम न्यायालय के वेतन वृद्धि से संबंधित फैसले से ओवर रूल हो चुकी थी। उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को अप्रैल 2003 से वेतन वृद्धि को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके चलते प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में यह अपील दायर की थी। मुख्य सचिव पी. मित्रा ने कहा कि वह रिकार्ड देखने के बाद ही कुछ बता सकते हैं।

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